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महाराष्‍ट्र में रेप हो गया तो इंसाफ की उम्‍मीद नहीं, 10 लाख रुपए जरूर देना चाहती है सरकार

महाराष्ट्र में रेप के करीब 16.1 फीसदी मामलों में ही अपराधियों को सजा हो पाती है जबकि राष्ट्रीय आंकड़ा 24.2 फीसदी का है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और मंत्री पंकजा मुंडे। (पीटीआई/फाइल फोटो)

महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा है कि बलात्कार, यौन छेड़छाड़ और एसिड अटैक की पीड़िताओं को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को 3 लाख से बढ़कर 10 लाख करने की योजना पर काम कर रहे हैं। सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि साल 2013 के अक्टूबर में मनोधैर्य योजना लॉन्च की गई थी जिसके तहत ऐसी पीड़िताओं को तीन लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का प्रावधान है लेकिन राज्य सरकार ने अब उसे बढ़ाने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि अगर पीड़िता को जरूरत महसूस हुई तो आर्थिक मुआवजे के अलावा उन्हें काउंसलिंग, व्यावसायिक शिक्षा या प्रशिक्षण भी देगी। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सलाह दी थी कि केस की गंभीरता को देखते हुए कुछ मामलों में मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 10 लाख करना चाहिए।

हाईकोर्ट की इस सलाह पर सरकारी वकील अभय पाटकी ने आज (5 अप्रैल को) कोर्ट को बताया कि सरकार ने मुआवजा बढ़ाने की योजना बना ली है और उसे 6 हफ्ते के अंदर अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने 14 साल की एक रेप पीड़िता के आवेदन पर सुनवाई करते हुए मुआवजा की राशि तीन लाख से ऊपर बढ़ाने की सलाह राज्य सरकार को दी थी। याचिका दाखिल करने के बाद इस पीड़िता को राज्य सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में दो लाख रुपये का मुआवजा दिया था। तब हाईकोर्ट की बेंच ने सरकार के इस कदम का आलोचना की थी और मनोधैर्य योजना को शर्मनाक, अमानवीय और बेइज्जत करने वाली योजना बताया था।

गौरतलब है कि देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में सजा देने का अनुपात बहुत कम है। महाराष्ट्र इस मामले में देश के औसत आंकड़े से दो तिहाई की दर से पीछे है। इस राज्य में रेप के करीब 16.1 फीसदी मामलों में ही अपराधियों को सजा हो पाती है जबकि राष्ट्रीय आंकड़ा 24.2 फीसदी का है। रेप पीड़िताओं के गुनहगारों को सजा देने के मामले में दूसरे बड़े राज्यों का हाल भी महाराष्ट्र जैसा ही है। गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी यह आंकड़ा 10 से 16 फीसदी के बीच ही है जबकि जम्मू-कश्मीर में यह आंकड़ा 10 फीसदी से भी कम है। एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेप के मामले में अधिकांश गुनहगार जुर्म को दोहराने वाले होते हैं जो सजा नहीं मिल पाने या उसमें देरी की वजह से दूसरी और तीसरी बार महिलाओं को अपना शिकार बनाते हैं।

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