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महाराष्ट्र: कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा-शिंदे की नजर शिवसेना के गढ़ पर, बीएमसी चुनाव पर है फोकस

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के सियासी उलटफेर के बाद 30 जून को शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने सीएम पद की शपथ ली थी। वहीं भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी।

महाराष्ट्र: कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा-शिंदे की नजर शिवसेना के गढ़ पर, बीएमसी चुनाव पर है फोकस
Maharashtra Politics: कैबिनेट विस्तार के दौरान महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे के साथ डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस। ( फोटो सोर्स: PTI)।

Maharashtra Politics: एकनाथ शिंदे की अगुवाली वाली महाराष्ट्र सरकार ने 9 अगस्त को अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। इस विस्तार में आने वाले निकाय चुनावों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उसके गढ़ मुंबई और औरंगाबाद में मात देने की योजना दिखाई देती है। बता दें कि यह कैबिनेट विस्तार शिंदे सरकार बनने के 35 दिन से अधिक समय बाद किया गया।

वहीं भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि पार्टी अभी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव और शिवसेना के गढ़ औरंगाबाद, ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में होने वाले नगर निकायों पर फोकस कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ गठबंधन ने मंत्रिपरिषद का विस्तार किया है। बता दें कि महाराष्ट्र के सियासी उलटफेर के बाद 30 जून को शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने सीएम पद और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी।

इन मंत्रियों ने ली शपथ:

इसमें विजयकुमार गावित, गिरीश महाजन, गुलाबराव पाटिल, राधाकृष्ण विखे पाटिल, चंद्रकांत पाटिल, दादा भूसे, संजय राठौड, सुरेश खाड़े, संदीपन भुमरे, उदय सामंत, तानाजी सावंत, रवींद्र चव्हाण, अब्दुल सत्तार, दीपक केसरकर, अतुल सावे, शंभूराज देसाई, सुधीर मुनगंटीवार, मंगल प्रभात लोढ़ा के नाम शामिल हैं।

हालांकि इस सूची में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और बांद्रा (पश्चिम) के विधायक आशीष शेलार का नाम शामिल न होने से कई राजनीतिक विश्लेषकों को हैरानी है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि आगामी बीएमसी चुनावों में आशीष शेलार की अहम भूमिका के चलते यह एक रणनीति का हिस्सा है। बता दें कि 2017 में शेलार भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष थे।

शेलार की अगुवाई में पार्टी ने बीएमसी के 227 वार्डों में से 82 वार्ड जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। भाजपा उस समय की अपनी सहयोगी शिवसेना से सिर्फ दो वार्ड पीछे थी। 1985 में पहली बार नगर निकाय में जीत के बाद से शिवसेना का कब्जा बना हुआ है। वहीं हाल के दिनों में शेलार ने खुद को एक कट्टर ठाकरे विरोधी नेता के रूप में पेश किया है। उन्होंने कथित तौर पर बीएमसी में वित्तीय अनियमितताओं और इसके खराब कामकाज को लेकर शिवसेना को घेरने का काम किया।

भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी आलाकमान राज्य के नेताओं के साथ मिलकर आगामी बीएमसी चुनावों में शिवसेना को कड़ी टक्कर देने और बीएमसी में 134 से अधिक वार्ड जीतने का खाका तैयार किया है।

ऐसे में बीजेपी की नजर औरंगाबाद नगर निगम पर भी है, जो शिवसेना का गढ़ रहा है। हाल ही में हुए शिंदे सरकार में कैबिनेट विस्तार में इस शहर से कम से कम तीन नए मंत्री बनाए गये हैं। इनमें अतुल सावे (भाजपा), अब्दुल सत्तार (शिंदे समूह) और संदीपन भुमारे (शिंदे गुट) हैं। वहीं एकनाथ शिंदे का गढ़ कहे जाने वाले ठाणे में सत्तारूढ़ गठबंधन को फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि अधिकांश मौजूदा नगरसेवकों ने शिंदे गुट में हैं।

इसके अलावा भाजपा ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में अपने आधार को मजबूत करने के लिए डोंबिवली से रवींद्र चव्हाण को मंत्री पद दिया है। उत्तर महाराष्ट्र में अपनी स्थिति करने के लिए भाजपा ने गिरीश महाजन, गुलाबराव पाटिल और दादासाहेब भूसे जैसे नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया है।

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