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महाराष्ट्र की स्कूली किताबों में गुजराती में पन्ने, एनसीपी नेता ने विधान भवन में दी आत्महत्या की धमकी

सदन में हंगामा बढ़ता देख 45 मिनट के लिए सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। जब दोबारा सदन की कार्रवाई शुरू हुई तब मुंडे ने फिर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार गुजरात के आगे सरेंडर कर रही है।

Author July 14, 2018 12:37 PM
एनसीपी विधायक सुनील तातकरे कक्षा 6 की भूगोल की किताब दिखाते हुए। (एक्सप्रेस फोटो)

महाराष्ट्र विधान परिषद में शुक्रवार (13 जुलाई) को एक नाटकीय घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक सुनील तातकरे ने राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री चंद्रकांत पाटिल से तीखी झड़प होने के बाद सदन में ही आत्महत्या करने की धमकी दे डाली। दरअसल, विपक्ष का आरोप था कि राज्यभर के स्कूलों में बांटी गई कक्षा 6 की भूगोल की किताब में कुछ पन्ने मराठी की जगह गुजराती में छापे गए हैं जो मराठी अस्मिता का अपमान है। एनसीपी नेता ने सदन में इस मामले को उजागर करते हुए आरोप लगाया कि रायगढ़ के माशल तहसील में ऐसी किताबें बेची गई हैं। इस पर उनकी मंत्री से भिड़ंत हो गई। हालात यहां तक पहुंच गए कि एनसीपी नेता ने आत्महत्या की धमकी दे डाली। बता दें कि ये किताबें महाराष्ट्र सरकार की एजेंसी बाल भारती द्वारा प्रकाशित की गई हैं।

सदन में नेता विपक्ष धनंजय मुंडे ने भी तातकरे के आरोपों को सही ठहराते हुए राज्य सरकार पर मराठी भाषा का अपमान करने का आरोप लगाया। मुंडे ने कहा कि ये किताबें अहमदाबाद की एक कंपनी ने छापी हैं। आरोपों पर जवाब देते हुए सदन के नेता और मंत्री पाटिल ने कहा कि गलतीवश कुछ किताबों में गुजराती पन्ने रह गए हैं, जिसे सुधार लिया जाएगा। उन्होंने सदन को कुछ किताबें भी दिखाईं जिसमें गुजराती में पन्ने नहीं छपे हुए थे। सदन में हंगामा बढ़ता देख 45 मिनट के लिए सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। जब दोबारा सदन की कार्रवाई शुरू हुई तब मुंडे ने फिर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार गुजरात के आगे सरेंडर कर रही है।

जब मंत्री पाटिल ने दोबारा कहा कि कुछ किताबों में गलतीवश त्रुटियां रह गई हैं तब मुंडे ने कहा कि करीब एक लाख किताबों में ऐसी गलतियां हुई हैं। इस पर मंत्री ने नेता विपक्ष पर आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि आपने ही जान बूझकर किताबों में गुजराती में छपे पन्ने घुसा दिए हैं। इस पर बिफरे नेता विपक्ष मुंडे ने कहा कि मंत्री जानबूझकर मामले को दबाने के लिए किताबों से गुजराती में छपे पन्ने फाड़ कर सदन को गुमराह कर रहे हैं। इसके बाद हंगामा होने लगा, तब सभापति ने सदन को दोबारा स्थगित कर दिया। तीसरी बार सदन की कार्यवाही जब शुरू हुई तब तातकरे ने मंत्री पाटिल को आरोप साबित करने की चुनौती दी और कहा कि 30 साल की राजनीतिक करियर में उन्होंने कभी ऐसे आरोप नहीं झेले। उन्होंने कहा कि अगर मंत्री के लगाए आरोप (किताब में गुजराती पन्ने घुसाना) साबित होते हैं तो वह सदन में ही जहर पीकर आत्महत्या कर लेंगे।

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