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महाराष्ट्र: ऋण योजना का लाभ चाहिए तो किसानों को इस कसौटी पर उतरना होगा खरा

उन्होंने कहा, ''यदि कोई हमें मध्यावधि चुनाव की ओर ढकेलना चाहता है तो मुझे भरोसा है कि हम फिर से सरकार का गठन करने में सफल होंगे।''

Author June 16, 2017 3:41 PM
महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस। (PTI File Photo)

महाराष्ट्र सरकार की ऋण योजना का लाभ केवल उन्हीं कृषकों को मिलेगा जिनकी आय का एकमात्र स्रोत कृषि है। चौदह जून को जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार जिन्हें अन्य कामों से आय हो रही है, उन्हें इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है, भले ही उनके पास कृषि जमीन क्यों न हो। इस योजना के तहत किसानों को 10000 रुपये की प्रारंभिक फसल ऋण सहायता दी जाती है।

राज्य के सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख ने कहा, ”10000 रुपये की प्रारंभिक ऋण सहायता योजना मुश्किल में फंसे केवल उन किसानों के लिए है जिनके पास कृषि ही एकमात्र आय का स्रोत है। अतएव, जीआर में विस्तृत सूची तैयार की गई है जो उन लोगों को बाहर कर देगी जिनके पास आय के दूसरे स्रोत हैं। उन्होंने कहा, ”पहली बार इतनी बारीकी से जीआर मसौदा तैयार किया गया है ताकि अनुचित लाभार्थियों को दूर रखा जा सके। ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों के कई शिक्षक, प्रोफेसर,दुकानदार और सेवा प्रदाता कृषि पर पूरी तरह आश्रित नहीं होते लेकिन वे कृषि के लिए ऋण का लाभ लेते हैं।”

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जीआर में कहा गया है कि स्थानीय निकाय और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना के पात्र नहीं होंगे। इसी प्रकार महाराष्ट्र दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम 1948 में दर्ज लोग भी लाभार्थियों की सूची से बाहर होंगे।

वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पहले की ऋणमाफी योजना में अनियमितताएं होने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि नई योजना का लाभ सिर्फ जरूरतमंद किसानों को ही मिले। पिछले दो सप्ताहों से किसानों के आंदोलन के बीच भाजपा नीत राज्य सरकार ने घोषणा की है कि वह एक नई ऋण माफी योजना लाएगी। संप्रग सरकार ने 2008 में किसानों के लिए एक देशव्यापी ऋणमाफी योजना घोषित की थी।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और अन्य राजस्व अधिकारियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पहले की योजना में भारी घोटाला हुआ था और इस संबंध में कैग की एक रिपोर्ट हम सबके लिए आंखें खोलने वाली है। उन्होंने कहा कि 80 लाख रुपये से अधिक के ऋण वाले लोगों को योजना का लाभ मिला। कई लाभार्थी तो किसान भी नहीं थे।

उन्होंने कहा कि कुछ बैंकों ने कई ऋणों को बट्टे खाते में डाल दिया था लेकिन योजना आने के बाद उन खातों को बहाल कर दिया गया और ऋण को माफ कर दिया।

 

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