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इस शहर के होटल दे रहे सिर्फ आधा गिलास पानी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

पुणे के होटल में खाना खाने आने वाले ग्राहकों को आधा ग्लास पानी दिया जा रहा है। यह शुरूआत जल संरक्षण के उद्देशय से की गई है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के पुणे रेस्टूरेंट और होटल एसोसिएशन द्वारा जल संरक्षण की दिशा में एक नई शुरूआत की गई है। यहां होटलों में खाने आने वालों को आधा ग्लास पानी ही दिया जा रहा है। होटल एसोसिएशन के सदस्यों का मानना है कि जिस तरीके से मराठवाड़ा और विदर्भ में पानी की समस्या है, वैसी स्थिति में जल का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा कि इस शुरूआत से शहर में स्थित होटलों में पानी की खपत 50 प्रतिशत तक कम हो गई है।

पीटीआई से बात करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेश शेट्टी ने कहा कि महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े शहर के होटलों में यह शुरूआत की गई है। इस महीने की शुरूआत से जब यह प्रक्रिया शुरू की गई है, होटलों में पानी की प्रतिदिन की खपत 50 प्रतिशत प्रतिशत तक कम हो गई है। इससे पहले हमारे होटलों में प्रतिदिन करीब 1600 लीटर पानी की खपत होती थी।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने इस प्लान से संबंधित ‘थीम कार्ड’ शहर के अन्य होटलों में भी बांटने का प्लान बनाया है। इनका लक्ष्य यह है कि लोगों के बीच पानी की खपत कम करने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलायी जाए। यह प्रक्रिया ऐसोसिएशन से जुड़े 8000 और एसोसिएशन से अलग 3500 होटलों में अपनाई जाएगी।

शेट्टी के अनुसार, पुणे में जब एक बार कोई ग्राहक खाने को आता है तो 100 मिलीलीटर पानी उसके ग्लास में बची रह जाती है, जो बर्बाद होती है। शहर के होटलों के बाहर ‘थीम कार्ड्स’ को प्रदर्शित किया जाएगा ताकि ग्राहक उसे पढ़ें और इस शुरूआत के उद्देशय को समझें। साथ ही होटल प्रबंधकों को एक कंटेनर रखने को कहा गया है जिसमें बचे हुए पानी को इकट्ठा किया जा सके और उस पानी का दूसरे कार्यों में इस्तेमाल हो सके, जैसे कि पेड़-पौधों को सिंचने में।

बता दें कि महाराष्ट्र का मराठावाड़ा क्षेत्र जल की संकट से जूझ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून आने में अभी करीब 7 महीने का समय बांकि है, लेकिन यहां के चार बड़े डैम में मात्र 20 प्रतिशत पानी का स्टाॅक बचा हुआ है। कुछ जिलों में पीने की पानी की समस्या काफी हद तक बढ़ सकती है।

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