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2019 में NCP विधायकों को होटल से पहुंचाया पवार के पास, 2022 में शिवसेना के बागियों को लाने पहुंची गोवा, फर्जी डॉक्‍यूमेंट से होटल में किया चेक-इन, जानें कौन हैं सोनिया दूहन

सोनिया दूहन हरियाणा के हिसार की रहने वाली हैं और एनसीपी छात्र सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

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सोनिया दूहन अपने गांव में लोगों के बीच (express file photo)

पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक घमासान में एक नाम जो सबसे अहम है, वह है सोनिया दोहन का। सोनिया दोहन एनसीपी की स्टूडेंट विंग की प्रेसिडेंट हैं। नवंबर 2019 और जून 2022 के ड्रामे में वे चर्चा में रहीं और सरकार बचाने का पूरा प्रयास करती रहीं। सोनिया हरियाणा के हिसार स्थित एक गांव से ताल्लुक रखती हैं लेकिन महाराष्ट्र के राजनीतिक घमासान में उनका रोल काफी अहम रहा।

शनिवार को एनसीपी छात्रसंघ की 30 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया दोहन और उनकी सहयोगी को गोवा के डोना पाउला में होटल ताज रिज़ॉर्ट और कन्वेंशन सेंटर में चेक इन करने के लिए फर्जी पहचान दस्तावेजों का उपयोग करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसी होटल में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बागी विधायक टिके हुए थे। लेकिन रविवार को दोनों को जमानत मिल गई।

यह सोनिया दूहन ही थीं जो नवंबर 2019 में भी सबसे आगे थीं और एनसीपी के 4 विधायकों को रेस्क्यू किया था, जब देवेंद्र फडणवीस ने अजीत पवार के साथ सरकार बनाई थी। सोनिया दूहन को हरियाणा के गुड़गांव के एक होटल से भाजपा की नाक के नीचे से एनसीपी के चार विधायकों को “बचाने” का श्रेय दिया गया था।

एनसीपी ने गोवा पुलिस के इस दावे का खंडन किया है कि सोनिया दूहन और उनके सहयोगी 28 वर्षीय श्रेय कोठियाल ने उस होटल में प्रवेश करने के लिए फर्जी कागजात का इस्तेमाल किया, जहां शिवसेना के बागी विधायकों को रखा गया था। एनसीपी यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा ने कहा कि वह दोनों सिर्फ “पर्यटक” थे और गोवा सरकार द्वारा बिना किसी कारण के उन्हें परेशान किया जा रहा।

सोनिया दूहन पर कथित तौर पर फर्जी कागजात का उपयोग करने पर एनसीपी यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा ने कहा, “अधिकारी सोनिया पर नजर रख रहे थे क्योंकि उन्होंने 2019 में (महाराष्ट्र में) तीन दिवसीय भाजपा सरकार के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सोनिया जब गोवा आईं तो उन्हें पता चला कि होटल में बहुत कड़ी सुरक्षा है और महाराष्ट्र या राजनीतिक पहचान वाले किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। तो उन दोनों ने श्रेय कोठियाल की आईडी से चेक इन किया, उसने अपने कार्ड से भुगतान किया, बुकिंग कोठियाल के नाम पर थी। सोनिया ने श्रेय की पत्नी श्रुति नारंग के पहचान पत्र का इस्तेमाल किया। यह कोई फर्जी दस्तावेज नहीं था।”

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सोनिया दूहन ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा, “पुलिस ने ब्लैक कैट कमांडो और एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के साथ मुझे शनिवार सुबह 5.30 बजे होटल के कमरे से उठाया। उन्होंने मेरे साथ एक आतंकवादी की तरह व्यवहार किया। घंटों तक इंटेलिजेंस ब्यूरो और पुलिस ने मुझसे पूछताछ की। यह युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश है। मेरे साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार करने की क्या जरूरत थी?”

2019 का जिक्र करते हुए सोनिया दूहन ने बताया कि कैसे उन्होंने विधायकों को बचाया था और शरद पवार के पास पहुंचाया था। उन्होंने याद करते हुए कहा, “हमने गुड़गांव के होटल के पांचवें को छोड़कर हर मंजिल पर एक कमरा बुक किया था, जहाँ किसी को भी अनुमति नहीं थी क्योंकि विधायक वहाँ रखे गए थे। उस मंजिल पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा नागरिक पोशाक में लगभग 50 सुरक्षाकर्मी और 60-70 राजनीतिक कार्यकर्ता थे, जो आगंतुकों पर कड़ी नजर रखते थे।”

सोनिया दूहन ने आगे बताया, “हमने पहले भागने के रास्तों की तलाश की जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। इसके बाद उन विधायकों को संदेश भेजा गया जिन्होंने बाहर आने की इच्छा जताई थी। हमें पता चला कि अगले दिन विधायकों को मानेसर ले जाने की योजना है। इसलिए बिना किसी देरी के, हमने उन्हें पिछले दरवाजे से बाहर निकालना शुरू किया, जो दूसरे होटल से जुड़ा हुआ था। हमने चुपचाप एक विधायक को निकाल लिया। हंगामा तब शुरू हुआ जब हम दो विधायकों को और निकाल रहे थे। मैंने अपनी कार छोड़ दी और दो विधायकों के लिए होटल के गेट से दूसरी कार ली।”

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