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महाराष्‍ट्र: कर्ज में डूबे किसान ने अपनी चिता तैयार की, जहर पीया फिर खुद को आग लगा ली

कर्ज में डूबे किसान ने जानवरों के चारे और लकडि़यों से अपनी चिता सजाई। फिर जहर खाकर आग लगा ली। घटना महाराष्ट्र की है।

किसान ने कर्ज ना चुका पाने के कारण की आत्महत्या (प्रतीकात्मक चित्र)। (imagev source-Facebook)

कर्ज में डूबे एक किसान को जब कहीं से भी उम्मीद की किरण नहीं दिखी तो उसने अपनी जिंदगी खत्म करने की ठान ली। पहले उसने अपनी चिता तैयार की और फिर जहर खा कर आग लगा ली ताकि उसके जिंदा बचने की कोई उम्मीद न रहे। दिल दहलाने वाली यह घटना भाजपा शासित राज्य महाराष्ट्र की है। इस बाबत एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य के बुलढ़ाना जिले के एक 35 वर्षीय किसान ने लोन न चुका पाने की स्थिति में आत्महत्या कर ली। आकस्मिक मौत की प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुखेदेतेजन गांव के रहने वाले गजानन जयभाए बीते शनिवार की रात अपने घर से निकले और खेत पर गए। उन्होंने वहां रखे जानवरों के चारे और लकडि़यों से अपनी चिता सजाई। फिर जहर खाकर आग लगा ली। रविवार की सुबह जब लोग खेत कर तरफ गए तो इस घटना की जानकारी हुई। इस मामले में मृतक के पिता के बयान के अधार पर बुलधना पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि मृतक के घरवालों का कहना है कि जयभाए पर कुछ लोन था, जिसे वे चुका नहीं पा रहे थे।

बता दें कि पूरे देश में कर्ज में दबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश के किसी न किसी कोने से अक्सर किसानों की आत्महत्या की खबरें आती रहती है। खेती में लगातार घाटा होने की वजह से किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं और जब दवाब ज्यादा बढ़ जाता है वे आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं। कभी मौसम की मार की वजह से उनकी फसलें खराब हो जाती है तो कभी अधिक उत्पादन की वजह से मंडी में उनका सामान नहीं बिक पाता है। कुछ किसानों ने कीटनाशक पी कर अपनी जान दे दी तो किसी ने फांसी लगा दी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 12602 लोगों ने आत्महत्या कर ली। इनमें करीब 8007 किसान थे और शेष 4595 खेती से संबंधित अन्य कार्यों में जुटे थे। इनमें सबसे ज्यादा 4291 किसानों ने महाराष्ट्र में आत्महत्या की थी।

 

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