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संजय राउत को शिंदे गुट के नेता की चेतावनी, कहा- बिना सुरक्षाकर्मियों के महाड आकर दिखाएं, शिवसैनिक उन्हें ‘प्रसाद’ देने से नहीं चूकेंगे

शिवसेना सांसद संजय राउत कई बार शिंदे गुट के बागी नेताओं को लेकर बयान देने पर चर्चाओं में आ चुके हैं। उनके एक बयान पर तो काफी बवाल भी मच गया था, जिस पर बाद में उन्होंने सफाई भी दी।

Vikas Gogawale
शिंदे गुट के नेता विकास गोगावले (फोटो सोर्स- एएनआई)

एकनाथ शिंदे गुट के नेता विकास गोगावले ने शिवसेना सांसद संजय राउत को चुनौती दी है कि रायगढ़ के महाड में बिना सिक्योरिटी के रैली करें, शिवसैनिक प्रसाद देने से चूकेंगे नहीं।

उन्होंने कहा कि संजय राउत ने कहा कि वो महाड में रैली करेंगे। तो उनको चुनौती है कि बगैर सुरक्षाकर्मियों के यहां आकर दिखाएं। शिवसैनिक प्रसाद देने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे।

बता दें कि इससे पहले संजय राउत का ट्वीट काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए कहा था कि कब तक छुपोगे गुवाहाटी में, आना ही पड़ेगी चौपाटी में। इसके अलावा भी शिंदे के बागी विधायकों के साथ दूसरे राज्य जाने के बाद से ही संजय राउत कई विवादित बयान दे चुके हैं।

संजय राउत ने बागी विधायकों को लेकर एक विवादित बयान देते हुए कहा था, “ये जो 40 लोग गुवाहाटी गए हैं, वो जिंदा लाश हैं, ये मुर्दा हैं। उनकी बॉडी ही मुंबई आएगी।” इसके बाद उनके इस बयान पर बवाल बढ़ता देख उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने आत्मा और जमीर मरने की बात की थी। उन्होंने कहा कि पार्टी से भागने वाले का जमीर मर गया है। उन्होंने कहा था कि उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई है, 40 साल पार्टी में रहते हैं और चले जाते हैं, तो समझिए वो जिंदा लाश ही हैं।

गौरतलब है कि पिछले 9-10 दिन से महाराष्ट्र की सियासत में चल रही उठा पटक अब खत्म हो गई और एकनाथ शिंदे के रूप में राज्य को नया मुख्यमंत्री भी मिल गया है। इतने दिनों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। शुरुआती दौर में इसे शिवसेना की अंतर्कलह माना जा रहा था, लेकिन शिंदे समेत शिवसेना के विभिन्न विधायकों ने बगावती रुख अख्तियार करते हुए सत्ता से महाविकास अघाडी गठबंधन का सफाया कर दिया। वहीं, राज्य में सबसे बड़े विपक्षी दल बीजेपी को शिंदे खेमे ने अपना समर्थन देकर गठबंधन की सरकार बना ली है। देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम बन गए हैं। हालांकि, पहले उन्होंने घोषणा की थी कि वो राज्य की सत्ता से बाहर रहेंगे, लेकिन बीजेपी नेतृत्व का मानना था कि उन्हें सत्ता में रहना चाहिए। इसके बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने भी उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

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