भीम आर्मी ने की रावण दहन पर रोक लगाने की मांग, कहा- न्‍याय और समानता में विश्‍वास करता था रावण

भीम आर्मी ने प्रतिबंध न लगाए पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई है। भीम आर्मी के अलावा, महाराष्ट्र के अन्य आदिवासी समुदायों ने भी रावण दहन का विरोध किया है।

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रावण। (प्रतीकात्मक फोटो)

दलित अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन भीम आर्मी ने मांग की है कि रावण दहन पर रोक लगनी चाहिए। ये रावण दहन हर साल दशहरा के पर्व पर रावण का पुतला जलाकर मनाया जाता है। इस ग्रुप ने पुणे पुलिस को पत्र लिखकर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। ये भी कहा गया कि जो भी पुतला फूंकेंगे उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा।

भीम आर्मी का ये मानना है कि रावण मानवतावादी संस्कृति का प्रतीक था और कई आदिवासी समुदाय उसे अपने आराध्य के रूप में पूजते हैं। भीम आर्मी ने पुणे पुलिस को लिखे अपने पत्र में लिखा है कि वह एक राजा था, जो न्याय और समानता में यकीन करता था। लेकिन बाद में इतिहास में छेड़छाड़ करके रावण को हजारों सालों से खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भीम आर्मी ने प्रतिबंध न लगाए पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई है। भीम आर्मी के अलावा, महाराष्ट्र के अन्य आदिवासी समुदायों ने भी रावण दहन का विरोध किया है।

जब महाराष्ट्र में रावण दहन पर प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है। उसी वक्त राजस्थान में, जब पूरे देश में रावण के पुतले जलाए जाते हैं तब जोधपुर में रावण के रिश्तेदार उसकी मौत का शोक मनाते हैं। सिर्फ यही नहीं, जोधपुर में तो रावण का मंदिर भी बना हुआ है, जहां दवे समुदाय के लोग न सिर्फ रावण की पूजा करते हैं बल्कि श्राद्ध पक्ष के दौरान रावण के लिए तर्पण भी करते हैं।

श्रीमाली दवे (गोधा) पंडित कमलेश दवे ने कहा कि श्रीमाली ब्राह्मण दवे (गोधा) मुदगल गौत्री जातियां इन्हें रावण की सेना का प्रहरी माना जाता है। रावण के सभी वंशज ​दक्षिण भारत के भिनमाल से लक्ष्मी विवाह के समय दक्षिण भारत से आ गए थे। बाद में वह देश के विभिन्न हिस्सों में बंट गए। इस जाति की आबादी सबसे ज्यादा गुजरात और राजस्थान में है।

पंडित कमलेश दवे ने कहा,”रावण हमारे पूर्वज हैं। इसी वजह से हम रावण दहन के दिन घर पर रहते हैं और नहाकर शुद्धि प्राप्त करते हैं।” उन्होंने कहा कि श्रीमाली समुदाय में दवे (गोधा) समाज के लोग श्राद्ध पक्ष की दशमी ति​थि को रावण के नाम का श्राद्ध और तर्पण भी करते हैं।

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