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ग्राउंड जीरो: ICU में कुर्सी पर बैठा था मरीज, नाक में लगी थी ऑक्सीजन की ट्यूब, आधी रात मिला बेड, पर 6 घंटे बाद ही तोड़ दिया दम, अस्पतालों की कहानी

Coronavirus in India: 1,135 मामलों और अब तक 72 मौतों के साथ, महाराष्ट्र की मृत्यु दर (6.3 फीसदी) राष्ट्रीय गणना (2.6 फीसदी) और वैश्विक औसत (5.5 फीसदी) की तुलना में बहुत अधिक है।

देश में घातक कोरोना वायरस लगातार अपने पैर पसार रहा है।

Coronavirus in India: ऑक्सीजन ट्यूब के साथ अपनी जिंदगी के आखिरी छह घंटे उसने आईसीयू में रखी एक कुर्सी में पर बैठकर गुजारे। वहां बैठे उसने अटेंडेंट को दो शवों को चादर में लपेटते हुए देखा। आखिरकार आधी रात को उसे बैड मिल सका, मगर छह घंटे बाद उसकी मौत हो गई। ये मुंबई (आखिर गिनती तक 714 कोरोना संक्रमित और 45 लोगों की मौत) में कोरोना वायरस फैलने के तहत मारे गए उस घबराए शख्स के आखिरी घंटे हैं जो हॉस्पिटल पहुंचने और टेस्ट किए जाने के बमुश्किल घंटे भर के भीतर मर गए।

खजूर व्यापारी के पिता (67) जिन्होंने केईएम अस्पताल में उनके सामने निकाले जा रहे दो शवों को देखा। केईएम हॉस्पिटल के डॉक्टर हेमंत देशमुख ने बताया, ‘अधिकांश मौतों में मरीज गंभीर हालत में पहुंचे।’ केईएम उन सरकारी अस्पतालों में से एक है जो कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर रहा है।

Coronavirus in India LIVE Updates

1,135 मामलों और अब तक 72 मौतों के साथ, महाराष्ट्र की मृत्यु दर (6.3 फीसदी) राष्ट्रीय गणना (2.6 फीसदी) और वैश्विक औसत (5.5 फीसदी) की तुलना में बहुत अधिक है। इंडियन एक्सप्रेस ने अंधेरी से मुंबई तक ऐसे कई मरीजों की जिंदगी के आखिरी दिनों पर नजर रखी जिन्हें एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल ले जाया गया। ऐसा ही एक केस यहां पढ़िए…

पुरुष, 67 साल
कोमोरबिडिटी: मधुमेह
अंधेरी वेस्ट निवासी को 19 मार्च को बुखार और सर्दी की शिकायत हुई। उनका बेटा उन्हें बीएसईएस एमजी हस्पिटल लेकर गया जहां डॉक्टर ने उन्हें पेरासिटामोल दी, जिसके चलते कुछ घंटों के लिए उनका बुखार कम हो गया। इसके बाद घर से करीब एक किलोमीटर दूर उन्हें नूर हॉस्पिटल ले जाया गया। यहां उन्हें भर्ती किया गया और सलाइन ड्रिप लगाई गई। 29 मार्च को एक्स-रे के लिए उन्हें लैब में ले जाया गया। मरीज के बेटे ने बताया, ‘चेस्ट स्कैन की रिपोर्ट सही थी। उनके लीवर में सूजन थी और मूत्र संक्रमण था।’

एक अप्रैल को एक बार फिर उनका एक्स-रे किया गया, जिसमें फेफड़े में सफेद धब्बे और निमोनिया के लक्षण दिखाई दिए। 2 अप्रैल को हॉस्पिटल ने मरीज को टर्टियरी केयर हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया। 67 वर्षीय मरीज के बेटे का कहना है कि वे उन्हें रूबी नर्सिंग होम ले गए, जहां ‘भर्ती नहीं’ किया गया था। वहां से परिवार उन्हें हिंदू हृदया सम्राट बालासाहेब ठाकरे ट्रॉमा हॉस्पिटल ले जाया गया।

मरीज के बेटे के मुताबिक ‘डॉक्टरों ने कहा कि वे केवल बहुत अधिक सांस की बीमारी वाले रोगियों या कोविड-19 मामले वाले या उनके संपर्क में आए मरीजों को ही एडमिट कर रहे थे। परिजनों के मुताबिक, मरीज को डॉक्टर आरएन कूपर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कहा कि आईसीयू में जगह नहीं है। मरीज के बेटे बताते हैं, ‘लोग बैड मिलने का इंतजार कर रहे थे और गलियारों में सो रहे थे।’

शाम को मरीज की हालात बहुत ज्यादा बिगड़ गई जिसपर उन्हें डॉक्टर आरएन कपूर हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर लिया। ECG टेस्ट किया और कोविड-19 टेस्ट के नमूना लिया गया। मरीज के पुत्र ने बताया, ‘एक बेड देने की विनती की मगर पहले ही दो बेड पर दो शव रखे हुए थे। तब मैं अपने पिता को सिर्फ कुर्सी पर बैठे इंतजार करता हुआ देख सकता था।’

दो अप्रैल को सुबह एक बजे मरीज को बिस्तर दिया गया, इस बीच मरीज ने अपने परिवार को थोड़ी देर आराम करने के लिए कहा। मगर सुबह सात बजे डॉक्टरों ने उन्हें तेज श्वसन संकट के बाद मृत घोषित कर दिया। घंटो बाद उनकी रिपोर्ट आई, जिसमें उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई।

जिसके बाद परिवार के आठ सदस्यों को तुरंत बुलाया गया। अभी तक मृतक को पत्नी को कोरना वायरस की पुष्टि हो चुकी है। उन्हें कस्तूरबा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। मृतक की पत्नी कहती हैं, ‘काश कम से कम एक निजी हॉस्पिटल ने मेरे पति को एडमिट कर लिया होता।’

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