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कांग्रेस नेता संजय निरूपम का सवाल: अनपढ़-गंवार पीएम के बारे में जानकर क्‍या करेंगे बच्‍चे?

यह पहला मौका नहीं है जब विपक्षी कांग्रेस के नेताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की हो। गुजरात चुनावों के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें नीच कहा था।

मुंबई कांग्रेस प्रमुख संजय निरुपम। (Express File Photo by Amit Chakravarty)

मुंबई कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संजय निरूपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने पीएम को अनपढ़ और गंवार कहा है। निरुपम ने बच्चों को मोदी जी पर बनी फिल्म को जबरन दिखाने का भी विरोध किया है। उन्होंने कहा, “मोदी जी के ऊपर कोई फिल्म बनी है और उसे दिखाने की जबर्दस्ती की जा रही है। यह सरासर गलत है। हमारे बच्चों को पॉलिटिक्स से दूर रखना चाहिए। दूसरी बात कि जो बच्चे स्कूल-कॉलेजों में पढ़ रहे हैं वो मोदी जैसे अनपढ़-गंवार के बारे में जानकर उनको क्या मिलने वाला है क्योंकि यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि आजतक हमारे देश के नागरिकों, बच्चों को पता ही नहां है कि हमारे प्रधानमंत्री की डिग्री कितनी है?”

यह पहला मौका नहीं है जब विपक्षी कांग्रेस के नेताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की हो। गुजरात चुनावों के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें नीच कहा था। उस वक्त भी राजनीति काफी गरम हुई थी। यहां तक कि कांग्रेस को गुजरात चुनावों में इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा था। पार्टी ने अय्यर के बयानों से खुद को किनारे कर लिया था और मणिशंकर अय्यर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। उससे पहले भी कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 2014 में अय्यर ने मोदी को चायवाला कहा था।

बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री क्या है? इस पर विवाद रहा है। एक शख्स ने सूचना का अधिकार के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएम नरेंद्र मोदी की बीए की मार्कशीट की जानकारी मांगी थी। सूचना नहीं मिलने पर सख्स ने केंद्रीय सूचना आयोग में शिकायत की थी। इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को वर्ष 1978 में बीए डिग्री पास करने वाले सभी विद्यार्थियों के रिकॉर्ड की पड़ताल करने का निर्देश दिया था। यूनिवर्सिटी के अनुसार इसी साल नरेंद्र मोदी ने यह परीक्षा पास की थी। आयोग ने डीयू की वह दलील खारिज कर दी थी कि यह तीसरे पक्ष की व्यक्तिगत सूचना है। बाद में डीयू ने आयोग के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी जिस पर कोर्ट ने आयोग के आदेश पर रोक लगा दिया।

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