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महंगा होगा ट्रेन का खाना, हाईकोर्ट ने द‍िया झटका, असर होगा मुसाफ‍िरों पर

कुछ समय पहले एक याचिका में महाराष्ट में रेलवे प्लेटफार्मों पर लगे बिक्री स्टॉल से बिकने वाले माल पर लगने वाले अप्रत्यक्ष करों को हटाने की मांग की गई थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट। (photo source – Indian Express)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की उस खाचिका को खारिज कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र में रेलवे प्लेटफार्मों पर लगे बिक्री स्टॉल से बिकने वाले माल पर लगने वाले अप्रत्यक्ष करों को हटाने की मांग की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति प्रकाश नाईक की पीठ ने साफ किया कि प्लेटफार्मों पर लगे सभी बिक्री स्टॉल से बिकने वाले माल पर टैक्स देना होगा। बता दें केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले रेल मंत्रालय के माध्यम से एक याचिका दायर करके टैक्स को हटाने की मांग की थी। महाराष्ट्र सरकार वेस्टर्न रेलवे कैंटीन / कैटरिंग सर्विस पर टैक्स चार्च करती है।

याचिका में आर्टिकल 285 का हवाला दिया गया था, जिसके मुताबिक राज्य सरकार केंद्र सरकार की किसी प्रॉपर्टी पर टैक्स नहीं ले सकती। इस पर राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया की ‘डीलर’ शब्द ना ही भारतीय संविधान में लिखा है और ना ही रेलवे में इसके बारे में जिक्र किया गया है। टैक्ट हटाने के जो भी प्रयास किए जाए रहें जो कि राज्य विधानमंडल की समझ से परे हैं।

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केस की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति प्रकाश नाईक की पीठ ने कहा कि इस तरह के केस देश के अन्य उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में भी आए हैं। अदालत ने केस का निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि, रेलवे उपरोक्त लाइनों पर बहस नहीं कर सकतीं।” कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि किसी भी तरह के टैक्ट की राहत नहीं दी सकती।

बता दें भारतीय रेलवे ने कुछ समय पहले  ‘विकल्‍प’ नाम की नई योजना चलाई थी। इस योजना के तहत अगर को वेटिंग लिस्‍ट में है तो उसे उसी रूट पर जाने वाली दूसरी ट्रेनों में खाली बर्थ में सीट दी जा सकेगी। इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं यात्रियों को मिलेगा, जिनके पास ई-टिकट है। इस योजना का लाभ लेने के लिए टिकट बुक करते समय दिए गए ऑप्शन को चुनना होगा। इस योजना में रेलवे ने साफ किया की वो किराये में अगर दूसरी ट्रेन का किराया ज्यादा है तो यात्रियों से किराया नहीं वसूला जाएगा और ना ही पैसे वापस किए जाएंगे।

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