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बीजेपी नेता ने उठाए सवाल- 7 दिन में कैसे मार डाले 3.19 लाख चूहे, बोले- बिल्ली फ्री में कर देती

उन्होंने कहा कि पूरे मुंबई शहर में छह लाख चूहों को मारने में बीएमसी को दो साल लग गए, लेकिन चूहे मारने वाली प्राइवेट कंपनी ने यह काम केवल सात दिनों के अंदर कर दिया। यह कैसे संभव है?

Author मुंबई | March 23, 2018 3:52 PM
महाराष्ट्र के पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र राज्य मंत्रालय में सात दिनों के अंदर तीन लाख से ज्यादा चूहों को मारने को लेकर बीजेपी नेता एकांत खड़से ने सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं, खड़से का यह भी कहना है कि इसके लिए पैसे देने की क्या जरूरत थी, जबकि चूहों को बिल्ली ही खा जाती और काम फ्री में हो जाता। गुरुवार को एकांत खड़से ने आरोप लगाया कि इसमें जरूर कोई घोटाला हुआ है। विधानसभा में पूर्व राजस्व मंत्री एकांत खड़से ने कहा कि उन्हें इसमें कुछ गड़बड़ नजर आ रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए। बता दें कि मंत्रालय के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक प्राइवेट कंपनी को चूहों को छह महीने के अंदर खत्म करने कार्य सौंपा था।

खड़से ने कहा, “मंत्रालय के चूहों को मारना का कॉन्ट्रैक्ट जिस कंपनी को दिया गया था, उसने दावा किया कि उन्होंने सात दिनों के अंदर-अंदर मंत्रालय के 3,19,400 चूहों को मार दिया है। इसे लेकर सवाल खड़ा होता है। क्या मंत्रालय में इतने ज्यादा चूहे हो गए थे और क्या इतने चूहों को सात दिन में मार पाना संभव हैं?” इन आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए पूर्व मंत्री ने कहा, “इस मामले में सरकार को जांच करनी चाहिए।” आगे उन्होंने कहा कि पूरे मुंबई शहर में छह लाख चूहों को मारने में बीएमसी को दो साल लग गए, लेकिन चूहे मारने वाली प्राइवेट कंपनी ने यह काम केवल सात दिनों के अंदर कर दिया। यह कैसे संभव है?

इस मामले पर आगे बात करते हुए खड़से ने कहा, “अगर अनके आंकड़े सही हैं तो इसका मतलब यह है कि कंपनी द्वारा एक दिन में 45,628 चूहे मारे गए हैं। इसका मतलब यह भी है कि यह कंपनी कुछ ज्यादा ही कुशल है जो हर एक मिनट में 31.68 चूहों को मारने में सक्षम है।” खड़से की यह बात सुनकर विधानसभा में बैठे सभी लोगों की हंसी छूट गई। इसके बाद खड़से ने कहा, “जिन चूहों को मारा गया है, उनका कुल वजन 9,125.71 किलोग्राम तो होगा। इसका मतलब इन चूहों को ढोने के लिए एक बड़े से ट्रक की जरूरत पड़ी होगी, लेकिन आश्चर्य की बात है कि ऐसी कोई प्रक्रिया मंत्रालय में किसी ने नहीं देखी।” इसके साथ ही खड़से ने कहा कि सरकार ने इस कार्य के लिए दस बिल्लियों को काम पर क्यों नहीं लगाया। अगर बिल्लियों को इस कार्य पर लगाया होता तो यह काम बहुत ही कुशल और बिना किसी कीमत के हो जाता।

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