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ज्ञानवापी विवाद के बीच राज ठाकरे की MNS ने किया महाराष्‍ट्र में पुण्‍येश्‍वर मंदिर पर दो दरगाहों के निर्माण का दावा

ज्ञानवापी विवाद के बीच महाराष्ट्र में पुण्येश्वर मंदिर पर दरगाह के निर्माण का मुद्दा उठने लगा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस भूमि को बहाल करने के लिए ‘पुण्येश्वर मुक्ति’ अभियान शुरू किया है।

Raj Thackeray, MNS
मनसे प्रमुख राज ठाकरे(फोटो सोर्स: PTI)।

ज्ञानवापी विवाद के बीच अब महाराष्‍ट्र में पुण्‍येश्‍वर मंदिर पर दो दरगाहों के निर्माण का मुद्दा भी उठने लगा है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के पुणे शहर में पुण्येश्वर मंदिर की जमीन पर दो दरगाहें बनाई गई हैं। इसके लिए मनसे ने अभियान भी शुरू किया है, लोगों से इससे जुड़ने की अपील की है।

मनसे महासचिव अजय शिंदे ने रविवार को कहा कि उन्होंने ‘पुण्येश्वर मुक्ति’ (मंदिर की भूमि मुक्त) अभियान शुरू किया है, और लोगों से मंदिर की भूमि को बहाल करने में इस लड़ाई का समर्थन करने की अपील की। ज्ञानवापी मस्जिद के हालिया सर्वेक्षण का हवाला देते हुए शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व पर राज ठाकरे के रुख के बाद सरकारें भी अब जगने लगी हैं।

उन्होंने कहा, “ज्ञानवापी की तरह हम भी पुणे के पुण्येश्वर मंदिर के लिए लड़ रहे हैं।” शिंदे ने दावा किया कि खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी के एक कमांडर ने पुणे में पुण्येश्वर और नारायणेश्वर मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था और बाद में जमीन पर दरगाहों का निर्माण किया गया था।

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वाराणसी कोर्ट में सुनवाई पूरी
ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सोमवार (23 मई 2022) को वाराणसी कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। यहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ सुनवाई हुई। जिला जज डॉ अजय कुमार विश्वेश ने सुनवाई की। इस दौरान हिंदू पक्ष ने सात मांगे रखी हैं। सुनवाई में 19 वकील और 4 याचिकाकर्ताओं समेत सिर्फ 23 लोगों को ही कोर्ट में रहने की इजाजत थी। हिंदू पक्ष ने श्रृंगार गौरी और वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा करने की इजाजत की मांग की है।

साथ ही, नंदी के सामने की दीवार को तोड़कर मलबा हटाने, शिवलिंग की लम्बाई और चौड़ाई जानने के लिए सर्वे और वजूखाने के वैकल्पिक इंतेजाम की भी मांग की। वहीं, दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष ने वजूखाने को सील करने का विरोध किया और 1991 के एक्ट के तहत ज्ञानवापी सर्वे केस पर सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए वाराणसी कोर्ट को 8 हफ्तों का समय दिया है और इस अवधि के अंदर ही सुनवाई पूरी करने को कहा है।

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