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सरकार से जमीन पाने को भटक रहे 98 वर्षीय पूर्व सैनिक का छलका दर्द, ‘क्‍या मंत्रालय पर आकर आत्‍महत्‍या करूं?’

1968 में जमीन का पूरा पैसा जमा करने के बाद चंद्रशेखर यह पता करते रहे कि उन्हें उनकी जमीन कब तक दी जाएगी। 1971 में रिटायर होने के बाद वे हर हफ्ते कलेक्टर के कार्यालय जाकर जमीन के बारे में पता करते थे।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

सतारा के रहने वाले 98 वर्षीय चंद्रशेखर जंगम एक पूर्व भारतीय सैनिक हैं, जो 54 साल पहले सरकार को बेची गई जमीन का हिस्सा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चंद्रशेखर का कहना है कि क्या सभी बुजुर्ग लोगों को न्याय पाने के लिए मंत्रालय आकर आत्मदाह कर लेना चाहिए। इतने साल बीत जाने के बाद भी चंद्रशेखर सरकार से न तो अपना पैसा वापस ले पाए हैं और न ही उन्हें जमीन का हिस्सा दिया गया है। मिड डे के अनुसार, चंद्रशेखर ने साल 1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में देश के लिए सेवा दी थी। 1971 में सूबेदार के पद से रिटायर होने के बाद चंद्रशेखर ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जिस देश के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन दे दिया, उसी की सरकार के खिलाफ उन्हें इतनी लंबी जंग लड़नी पड़ेगी।

चंद्रशेखर बहुत बीमार रहते हैं और वे एक बार में केवल कुछ शब्द ही बोल पाते हैं। चंद्रशेखर को ठीक से बात करने में काफी परेशानी होती है। मिड डे को चंद्रशेखर की पत्नी चंद्रभागा ने पूरी कहानी बताई है। रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मेडल प्राप्त कर चुके चंद्रशेखर ने 1964 में सरकारी संकल्प के तहत सतारा के रविवार पेठ में जमीन के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद उन्हें 16,880 स्क्वेयर फीट का प्लॉट आवंटित किया गया था, जिसके लिए उन्होंने 3, 547 रुपए की रकम अदा की थी। इस सौदे की रसीद अभी भी चंद्रशेखर के पास मौजूद है।

1968 में जमीन का पूरा पैसा जमा करने के बाद चंद्रशेखर यह पता करते रहे कि उन्हें उनकी जमीन कब तक दी जाएगी। 1971 में रिटायर होने के बाद वे हर हफ्ते कलेक्टर के कार्यालय जाकर जमीन के बारे में पता करते थे। कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद चंद्रशेखर जब परेशान हो गए तो उन्होंने 1977 में सरकार से कहा कि उन्हें उनका पैसा लौटा दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। जमीन के लिए 1983 तक पता किया, लेकिन इसके बाद वे थक गए और उन्होंने जमीन के लिए पता करना छोड़ दिया। फिलहाल, चंद्रशेखर सतारा के रहीमातपुर में अपनी तीन बेटियों और दो बेटों के साथ रह रहे हैं।

2013 में चंद्रशेखर के बेटे ने इस लड़ाई को फिर से लड़ने का फैसला लिया और उन्होंने एक एनजीओ की मदद से जमीन के बारे में पता करने के लिए आरटीआई दाखिल की। आरटीआई में कुछ रिकॉर्ड पाए गए तो वहीं काफी चीजें गायब भी थीं। पिछले हफ्ते चंद्रशेखर का परिवार और एनजीओ के प्रमुख डॉ विजय जंगम विधान भवन पहुंचे, जहां पर उन्होंने राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे मामले की जांच करेंगे। उन्होंने सतारा के कलेक्टर को मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए भी कहा है।

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