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पिता चलाते थे बूचड़खाना, लेकिन 50 साल से गौसेवा कर रहा बेटा, मिला पद्म श्री

महाराष्ट्र के शब्बीर सैय्यद को सामाजिक कार्य और पशु कल्याण के लिए पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। इससे पहले शब्बीर के पिता बूचड़खाना चलाते थे, लेकिन बाद में पूरा परिवार गौसेवक बन गया।

Author January 26, 2019 2:23 PM
प्रतीकात्मक चित्र फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। इस बार दिए जा रहे 112 पद्म पुरस्कारों में चार शख्स को पद्म विभूषण, 14 को पद्म भूषण, 94 लोगों को पद्मश्री देने का ऐलान किया गया है। इस बीच एक दिलचस्प बात यह रही कि पद्म पुरस्कार पाने वालों में एक शख्स ऐसा भी शामिल है, जो पहले बूचड़खाना चलाता था लेकिन बाद में गौसेवक बन गया था। बताते है कि वर्तमान में इस शख्स के पास करीब 165 गोवंश हैं।

दरअसल, शुक्रवार को महत्वपूर्ण नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। इसके तहत कला, समाज सेवा, लोक मामलों, विज्ञान व इंजिनियरिंग, व्यापार व उद्योग, मेडिसिन, साहित्य व शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पद्म पुरस्कार दिए जाते है। इस दौरान महाराष्ट्र के बीड जिले में शिरूर कासार तालुका के रहने वाले शब्बीर सैय्यद (58 ) को सामाजिक कार्य और पशु कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए पद्मश्री देने की घोषणा की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो पानी की किल्लत से जूझते हुए इलाके से आने के बावजूद शब्बीर पिछले करीब 50 सालों से तमाम दिक्कतों के वाबजूद गायों की सेवा कर रहें हैं। शब्बीर के मुताबिक, पिता पहले बूचड़खाना चलाते थे लेकिन एक दिन उन्होंने इससे छुटकारा पाने की ठानी और वो काम बंद कर गोसेवा का काम शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि गाय का गोबर बेंचकर वो अपना खर्च चलाते है। ख़ास बात यह है कि वो न तो गाय बेंचते हैं और न ही दूध, अगर वो बैलों को बेंचते भी है तो सिर्फ किसानों के हाथों ही सौदा करते है।

बताया जा रहा है कि शब्बीर अगर बैलों को किसी किसान के हाथों बेंचते भी है तो बाकायदा किसान से कागज़ में लिखवाते है कि वो जानवर को कसाई के हाथों नहीं बेचेगा। फिलहाल इन सबके चलते क्षेत्र में उनकी पहचान गौसेवक की बनी हुई है। इस कार्य में शब्बीर का पूरा परिवार सहयोग करता है। बताते है कि वर्तमान में शब्बीर के पास करीब 165 गोवंश हैं। गौसेवा की परंपरा इसके पूर्व शब्बीर सैय्यद के पिता बुदन सैय्यद ने करीब 50 साल पहले शुरू की थी। शब्बीर के मुताबिक, पिता ने दो गायों से शुरुआत की थी जिसके बाद पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उसने भी 70 के दशक में 10 गायों को खरीदकर गौसेवा की शुरुआत कर दी।

बता दें कि पद्म सम्मान के लिए के लिए कोई भी व्यक्ति किसी के भी नाम की अनुशंसा कर सकता है। इसके लिए अधिकतम 800 शब्दों में अपने योगदान को बताते हुए पद्म सम्मान के लिए नामांकित किया जा सकता है। इस बार यह सम्मान पाने वालों में 21 महिलाएं, एक ट्रांसजेंडर और 11 विदेश से संबंधित लोग शामिल हैं।

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