महाराष्ट्र सरकार ने 2029 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के लिए इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में कई नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। सरकार का फोकस अब केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर जिलों और छोटे कस्बों के जमीनी स्तर के इनोवेटर्स और उद्यमियों तक पहुंच बनाने पर है।
राज्य जल्द ही ‘सीएम महा फंड’ लॉन्च करेगा। इसके तहत पांच वर्षों में 25,000 उद्यमियों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसके अलावा, आने वाले कुछ महीनों में महाराष्ट्र के हर जिले में माइक्रो-इन्क्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे।
हर जिले में बनेंगे माइक्रो-इन्क्यूबेटर
माइक्रो-इन्क्यूबेटर शुरुआती चरण के स्टार्टअप और इनोवेटर्स को मेंटरशिप, प्रयोगशालाओं, वर्कस्पेस, बिजनेस से जुड़ी जानकारी और निवेशकों के नेटवर्क तक पहुंच उपलब्ध कराएंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रहे युवाओं और नए उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है।
महाराष्ट्र स्टेट इनोवेशन सोसाइटी के सीईओ श्रीकांत पाटील ने कहा कि माइक्रो-इन्क्यूबेटर जिलों में स्थानीय स्तर की समस्याओं पर काम करने वाले इनोवेटर्स, उभरते उद्यमियों और स्टार्टअप्स को सहायता देंगे। इन केंद्रों के जरिए उन्हें प्रोटोटाइप तैयार करने, टेस्टिंग और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने का अवसर मिलेगा।
स्कूल छोड़ने वाले युवाओं को भी मिलेगा मौका
महाराष्ट्र सरकार का माइक्रो-इन्क्यूबेशन मॉडल उन युवाओं को भी अवसर देने की कोशिश करेगा, जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और विभिन्न वर्कशॉप में व्यावहारिक प्रशिक्षण हासिल किया है।
महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा के मुताबिक, ऐसे कई युवाओं के पास अपने आइडिया होते हैं, लेकिन उन्हें उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मंच नहीं मिल पाता। जिलों में माइक्रो-इन्क्यूबेटर उन्हें भविष्य के इनोवेटर बनने का रास्ता उपलब्ध करा सकते हैं।
हर जिले में उभर रहे स्टार्टअप क्लस्टर
मनीषा वर्मा ने कहा कि राज्य के लगभग हर जिले में स्टार्टअप क्लस्टर उभर रहे हैं। महाराष्ट्र में करीब 50,000 महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप होने का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनका कहना था कि राज्य में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत नेतृत्व दिखाई दे रहा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े स्टार्टअप हब में से एक बन चुका है और सरकार अब इनोवेशन को महानगरों से बाहर जिलों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।
क्लीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी जोर
श्रीकांत पाटील और मनीषा वर्मा पुणे स्थित सीएसआईआर-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी में आयोजित ‘ए सेलिब्रेशन ऑन एनर्जी इनोवेशंस’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में वेंचर सेंटर के क्लीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन इनोवेशन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया गया।
राज्य सरकार की योजना एक क्षेत्रीय इनोवेशन हब स्थापित करने की भी है। यहां बड़े स्तर की समस्याओं पर काम करने वाले स्टार्टअप्स और एआई, ग्रीन एनर्जी जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले इनोवेटर्स को सहायता दी जाएगी।
300 एकड़ में बनेगा इनोवेशन सिटी
मुंबई में करीब 300 एकड़ जमीन पर एक ‘स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इनोवेशन सिटी’ विकसित करने की योजना भी है। यह विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग तरह के इनोवेशन को एक साझा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगी।
श्रीकांत पाटील ने कहा कि मुख्यमंत्री का लक्ष्य 2029 तक महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। उनके मुताबिक, केवल पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग के सहारे यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा और इसके लिए इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना जरूरी है।
बिना सरकारी टेंडर के स्टार्टअप्स को 25 लाख रुपये तक की मदद
सरकार की ‘स्टार्टअप वीक’ पहल के तहत अलग-अलग क्षेत्रों से चुने गए 50 स्टार्टअप्स को 25 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इन स्टार्टअप्स को सरकारी टेंडर प्रक्रिया से गुजरे बिना इनोवेशन के लिए सहायता मिलती है। इन स्टार्टअप्स को नगर निगमों, जिला परिषदों और अन्य स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर स्थानीय समस्याओं के समाधान पर काम करने का अवसर दिया जा रहा है।
आदिवासी युवाओं के इनोवेशन को भी बढ़ावा
महाराष्ट्र में ‘स्टार्टअप यात्रा’ जैसी पहल के जरिए राज्य के सभी ब्लॉकों में इनोवेशन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। वहीं, आदिवासी समुदाय के युवाओं के बीच उद्यमिता और इनोवेशन की सोच विकसित करने के लिए बिरसा योजना भी चलाई जा रही है। पाटील के मुताबिक, करीब 200 आदिवासी स्टार्टअप्स को क्षमता निर्माण के लिए सहायता दी जा रही है, ताकि आदिवासी युवाओं में उद्यमिता और इनोवेशन की सोच को मजबूत किया जा सके।
महिला उद्यमियों के लिए भी योजनाएं
महाराष्ट्र में महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर महिला स्टार्टअप योजना जैसी योजनाएं मौजूद हैं। इसके तहत महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को 5 लाख से 25 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
इन सभी पहलों के जरिए महाराष्ट्र सरकार इनोवेशन को सिर्फ बड़े शहरों और तकनीकी संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय जिलों, छोटे उद्यमियों, महिलाओं, आदिवासी युवाओं और व्यावहारिक कौशल रखने वाले युवाओं तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि जमीनी स्तर पर तैयार होने वाले नए इनोवेशन और स्टार्टअप महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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