Maharashtra: Public Prosecutor Ujjwal Nikam escapes unhurt in Road Mishap on Mumbai-Pune Expressway - सड़क हादसे में बाल-बाल बचे आतंकी कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील उज्जवल निकम - Jansatta
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सड़क हादसे में बाल-बाल बचे आतंकी कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील उज्जवल निकम

निकम कई बड़े आतंकवादियों से जुड़े केस संभाल चुके हैं। कसाब को फांसी दिलाने के अलावा वह साल 1993 में हुए बम विस्फोट, टी-सीरीज कंपनी के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या और बीजेपी नेता प्रमोद महाजन के कत्ल सरीखे मामलों में सरकार की ओर से पैरवी कर चुके हैं।

जाने-माने वकील उज्जवल निकम (एक्सप्रेस फोटोः केविन डिसूजा)

जाने-माने सरकारी वकील उज्जवल निकम मंगलवार (पांच जून) को सड़क हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचे। पुणे-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर उनकी गाड़ी को पुलिस के वाहन ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी थी। हादसे के दौरान पुलिस वाहन में बैठे दो पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं। घटना खंडाला घाट इलाके के पास पाक में करीब आठ बजे हुई थी। निकम तब मुंबई लौट रहे थे।

अच्छी बात रही कि निकम घटना के बाद सही-सलामत हैं। रायगढ़ के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चोटिल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए नजदीक के अस्पताल ले जाया गया, जबकि निकम फौरन मुंबई चले गए। डीएनए से हुई बातचीत में निकम बोले, “मैं बिल्कुल ठीक हूं। घाट इलाके में घटना के वक्त बारिश हो रही थी। अचानक एक हादसा होने के बाद मेरे ड्राइवर से गाड़ी घीमी कर दी थी। तभी पीछे से किसी वाहन ने आकर हमारी गाड़ी को टक्कर मारी थी।”

आतंकी मोहम्मद अजमल कसाब के ट्रायल के दौरान निकम विशेष अभियोजक की भूमिका में थे। (फाइल फोटो)

निकम कई बड़े हत्याकांडों और आतंकवादियों से जुड़े पेंचीदे केस संभाल चुके हैं। उन्होंने मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमलों के दौरान दबोचे गए आतंकी अजमल कसाब को फांसी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 26 नवंबर 2008 में आतंकी हमला मुंबई में किया गया था, जिसे समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से आए कुछ आंतकियों ने अंजाम दिया था।

कसाब को फांसी दिलाने के अलावा वह साल 1993 में हुए बम विस्फोट, टी-सीरीज कंपनी के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या और बीजेपी नेता प्रमोद महाजन के कत्ल सरीखे मामलों में सरकार की ओर से पैरवी कर चुके हैं। अपने शानदार काम के चलते उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।


निकम को पद्मश्री सम्मान देते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी। (फोटोः फेसबुक)

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