एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और एनसीपी (एसपी) के विलय की चर्चा को फिर से हवा दी है। तटकरे ने गुरुवार को कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी ने अजित पवार की मृत्यु के बाद इस मुद्दे पर चर्चा रोक दी थी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत को फिर से शुरू करना पार्टी पर निर्भर है।
सुनील तटकरे ने यह इशारा करते हुए कहा कि शरद पवार की पार्टी को ही बातचीत शुरू करनी होगी। उन्होंने कहा, “अजित पवार के जीवित रहते दोनों पक्षों ने विलय पर चर्चा की थी। हम उनके द्वारा लिए गए विलय के फैसले का समर्थन करते लेकिन उनकी मृत्यु के बाद बातचीत रुक गई। बाद में उनके (एनसीपी-एसपी) नेताओं ने अपने कार्यक्रम में घोषणा की कि उनके लिए विलय का मुद्दा खत्म हो गया है। अगर बातचीत फिर से शुरू होती है तभी हम अपनी राय बता सकते हैं।”
अजित पवार की मृत्यु से पहले एनसीपी का विलय होने वाला था
यह पहली बार है जब एनसीपी के किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि दोनों पार्टियों का विलय होने वाला था और अजित पवार भी इसके पक्ष में थे। अजित की मृत्यु के अगले दिन इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी कि 8 फरवरी को दोनों एनसीपी पार्टियां विलय की घोषणा करने वाली थीं। उस समय बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी और दोनों पक्षों के नेता जिला परिषद चुनाव परिणामों के बाद औपचारिकविलय के लिए जमीन तैयार कर रहे थे।
सुनील तटकरे की ये टिप्पणियां महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी) के साथ हुई मुलाकात के एक दिन बाद आईं। जानकारी के मुताबिक, सुनेत्रा ने तटकरे से पूछा कि उन्होंने और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ हुई अपनी मुलाकात के बारे में उन्हें क्यों नहीं बताया । मंगलवार रात हुई इस मीटिंग में एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल की उपस्थिति ने विलय की संभावना को फिर से हवा दी।
सुनील ने सुनेत्रा पवार के साथ अनबन की खबरों का खंडन किया
वर्षा में हुई बैठक के बारे में पूछे जाने पर सुनील तटकरे ने कहा, “हम अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित कार्यों पर चर्चा करने गए थे। हमारी वहां जयंत पाटिल से मुलाकात नहीं हुई।” हालांकि, एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष ने सुनेत्रा पवार के साथ अनबन की खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “अजित दादा के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध थे और सुनेत्रा (भाभी) के साथ भी मेरे वैसे ही संबंध हैं। गलतफहमी या उनके मुझसे किसी बात पर नाराज होने का कोई सवाल ही नहीं है।”
हालांकि, सूत्रों ने बताया कि बुधवार सुबह तटकरे के साथ हुई बैठक में सुनेत्रा पवार ने मुख्यमंत्री फड़नवीस के आवास पर हुई बैठक के बारे में जानकारी न दिए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। सुनील तटकरे ने सुनेत्रा को बताया कि उन्हें और प्रफुल्ल को पता चला था कि एनसीपी (एसपी) परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकती है, जिसके बाद उन्होंने फड़नवीस से मुलाकात की। तटकरे ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि वे मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी से बचना चाहते थे।
गौरतलब है कि एनसीपी में साल 2023 में फूट पड़ गई थी जब दिवंगत अजित पवार अधिकांश विधायकों के साथ अलग होकर भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे। हालांकि, जनवरी में विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद से दोनों एनसीपी के फिर से एकजुट होने की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब सुनेत्रा पवार और उनके बेटे संगठन पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें पुराने नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
एनसीपी दो गुटों में विभाजित
एनसीपी में फूट बढ़ती जा रही है। एक गुट पवार परिवार (सुनेत्रा और उनके बेटे) की तरफ है क्योंकि वे सत्ता में हैं और पार्टी के शीर्ष पर हैं। वहीं दूसरा गुट उपमुख्यमंत्री के बड़े बेटे पार्थ पवार के उदय के बाद खुद को हाशिए पर महसूस कर रहा है। सुनेत्रा पवार के करीबी सूत्रों ने संकेत दिया है कि पार्थ, तटकरे की जगह उत्तर महाराष्ट्र के किसी विधायक को नेता बनाने की सोच रहे हैं जबकि सुनील तटकरे ने खुले तौर पर कहा है कि वे राज्य में पार्टी के नेता बने रहेंगे।
पार्टी ने यह भी फैसला किया है कि वह अपने राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह द्वारा सुनेत्रा की एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्ति को चुनौती देने वाले लीगल नोटिस का जवाब नहीं देगी। पवार परिवार के करीबी एक सूत्र ने कहा, “इसका जवाब देना भी अनावश्यक है। अगर इस नोटिस को भेजने के पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा है, तो हमारे जवाब न देने के फैसले के बाद वह खुद ही सामने आ जाए।”
विधायकों के बीच भी ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि दोनों एनसीपी दलों के विलय से पार्टी को नई ऊर्जा मिल सकती है लेकिन अभी तक किसी ने भी आधिकारिक तौर पर नेतृत्व के सामने यह मुद्दा नहीं उठाया है। सूत्रों ने बताया कि जब तक पवार परिवार नेतृत्व के मुद्दे पर आम सहमति नहीं बना लेता तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है।
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महाराष्ट्र की नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बुधवार को डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के बीच एक बैठक हुई। मीटिंग दोनों नेताओं के बीच असंतोष पर खत्म हुई। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
