महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने abp न्यूज़ से बातचीत की। इस दौरान एंकर ने उनसे राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल किया। एंकर ने पूछा कि अगला चुनाव कब से लड़ेंगी, राज्यसभा में रहेंगी, इसी पार्टी में रहेंगी या फिर कुछ और? इस सवाल पर प्रियंका चतुर्वेदी भड़क गईं। उन्होंने कहा कि क्या आपने सिंधिया और जितिन प्रसाद से इतनी बार सवाल पूछा है। 2019 से इस सवाल का जवाब दे रही हूं। शायद अगले 25 साल भी मीडिया को देना पड़ेगा कि जिस वजह से मैंने कांग्रेस छोड़ी थी, वो मेरी राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि मैं शिवसेना में एक कमिटमेंट से आई हूं। सत्ता मोह नहीं है, सम्मान की लड़ाई है। उद्धव ठाकरे पूरी महाराष्ट्र की जनता से बात कर रहे हैं। शिवसेना के सभी कार्यकर्ता उद्धव ठाकरे के साथ हैं। ये शिवसेना में पहली बार नहीं हुआ है। ये पहले भी हो चुका है। अभी हर शिव सैनिक आतुर है कि इसका सबक सिखाना पड़ेगा। हम भविष्य में और मजबूती के साथ आएंगे। हम उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।
शिवसेना सांसद ने कहा कि सत्ता जाने से ज्यादा दर्द इस बात का होता है कि जब कोई वरिष्ठ नेता, जो पार्टी की शुरूआत से साथ रहा, जिसे शिव सैनिकों का मनोबल बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वो जब इस तरह का काम करते हैं, पार्टी से बगावत करते हैं तो हमारे जैसे युवा नेताओं को दुख होता है। सत्ता तो आती जाती रहती है। दुख इस बात है कि जिन्हें अपना माना उन्होंने इस तरह की बगावत की।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि शिवसेना ने अगर तब एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन किया तो वो गलत हो गया, बीजेपी क्या करती है? ये तो बीजेपी का ही चलन है। बीजेपी जब गठबंधन करती है सवाल क्यों नहीं उठते। हिंदुत्व के लिए साथ छोड़ा गया, ये कहा जा रहा है, क्या हिंदुत्व अपनों से बगावत करना सिखाता है। हिंदुत्व आपस में लड़ना नहीं सिखाता। उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व पर सरकार चलाई है। उनके और हमारे हिंदुत्व में जमीन आसमान का अंतर है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि कहा कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह से ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल करके एक रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। एक होता है कि चुनाव के जरिए जीतकर या गठबंधन करके सरकार बनाई जाती है और दूसरा जबरदस्ती एजेंसियों का इस्तेमाल करके बीजेपी की सरकार बनाई जाती है। बीजेपी आज दोनों तरह से सरकार बना रही है।