महाराष्ट्र के पुलिस अधिकारियों ने द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि नवी मुंबई, जालंधर और दार्जिलिंग निवासियों के बीच गहरी हो गई। ये तीनों म्यांमार में थाईलैंड बॉर्डर के पास एक कुख्यात साइबर स्कैम कंपाउंड में फंसे हुए थे। आरोप था कि यहां इन लोगों से जबरन साइबर स्कैम कराया जा रहा था। जनवरी में, स्थानीय कानूनी एजेंसियों की ओर से चलाई गए एक अभियान के दौरान इन तीनों को छुड़ा लिया गया और भारत वापस भेज दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि ठीक उसी समय उनकी कहानी ने एक अधिक गहरा और क्राइम थ्रिलर जैसा मोड़ ले लिया।

साइबर धोखाधड़ी की दुनिया को पीछे छोड़ने के बजाय, कथित तौर पर इन तीनों ने ऑनलाइन स्कैम करना शुरू कर दिया था। वे मुंबई के पास एक फॉर्महाउस से एक संगठित साइबर क्राइम ऑपरेशन चलाने की योजना बना रहे थे, तभी मार्च में पुणे की पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जांच टीम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बताया, “वे अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। हमने उनसे दो और लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जो उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद कर रहे थे।”

पुलिस कमिश्नर ने दी जानकारी

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, पिंपरी चिंचवड़ के पुलिस कमिश्नर विनय कुमार चौबे ने कहा, “हमारी जांच से पता चलता है कि कैसे संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क एक ओर युवाओं को शोषण कर रहे तो दूसरी ओर प्रशिक्षित ऑपरेटिव्स का एक ऐसा समूह भी तैयार कर रहे हैं, जो देश में ही ऐसे आपराधिक मॉडल्स को दोहरा सकते हैं।”

2.1 करोड़ की थी धोखाधड़ी

पिंपरी चिंचवड़ के साइबर क्राइम पुलिस थाने में एक बिजनेसमैन और उसके माता-पिता ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके और मां-बाप के साथ शेयर ट्रेडिंग घोटाला किया गया, जिसमें उनसे 2.1 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।

पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि दो लोगों ने खुद को शेयर मार्केट का विशेषज्ञ बताया था, उन्होंने खुद का नाम सरथ कुमार मलिक और शालिनी कुलकर्णी थे और उनके साथ एक नकली शेयर ट्रेडिंग ऐप के जरिए उनके साथ धोखाधड़ी की। जांचकर्ताओं को पता चला कि ठगी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा नवी मुंबई की एक निजी कंपनी के खाते में गया था।

मार्च में किया गया गिरफ्तार

मार्च के आखिर में, पुलिस ने 42 वर्षीय कंपनी के प्रमोटर सुशील भगवान जुवतकर का पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया, सुशील भगवान जुवतकर नवी मुंबई के नेरुल पश्चिम के रहने वाले एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं। पुलिस के इस ऑपरेशन में शामिल दो और संदिग्धों ( जालंधर के पंकज राज कपूर और दार्जिलिंग के निश्चल टैंकबीर बरेयाली) को भी गिरफ्तार किया। ये दोनों ही सुशील कुमार जुवतकर के साथ नेरुल आ गए थे।

अधिकारी ने बताया, हमें पता चला कि संदिग्ध नेरुल में एक ऐसी जगह से काम कर रहे थे, जिसका संबंध सुशील कुमार की ओर रजिस्टर्ड एक कंपनी से था। तलाशी के दौरान एक बड़े साइबर क्राइम ऑपरेशन का पता चला। अधिकारी ने बताया, “हमने करीब दो दर्जन बैंक खातों की पूरी किट पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और उनसे जुड़े सिम कार्ड बरामद किए, जिनमें इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जा रहा था, इनके साथ ही हमें आधे दर्जन मोबाइल फोन, पॉइंट ऑफ सेल उपकरण और 12 मुहरें भी मिलीं।”

अधिकारी ने आगे कहा, इन खातों की जांच से पता चला कि इनका इस्तेमाल देश भर में कम से कम 120 अपराधों में किया गया था और इनमें 2 से 18 करोड़ रुपये तक के लेन-देन हुए थे।

कैसे पहुंचे थे म्यांमार?

जांच में पता चला कि इन तीनों ने यह काम करने के तरीके तब सीखे, जब वे सोशल मीडिया पर बैंकॉक में मोटी सैलरी वाली नौकरियों का वादा करने वाले लुभावने विज्ञापनों के झांसे में आ गए। थाईलैंड पहुंचने के बाद, उन्हें कथित तौर पर म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर पर स्थित म्यांमार के म्यावाडी इलाके में मौजूग बदनाम केके पार्क साइबर स्कैम कंपाउंड में ले जाया गया। अधिकारी ने बताया, यह कंपाउंड संगठित साइबर अपराधों के लिए कुख्यात है, जहां विदेश में नौकरी के झूठे वादे करके लाए गए हजारों युवाओं का शोषण किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने इन स्कैम सेंटरों को एक बड़ा क्रिमिनल सिस्टम बताया है, ये सेंटर मानव तस्करी और जबरदस्ती करवाए जाने वाले ऑनलाइन धोखाधड़ी में संलिप्त हैं। 2023 के बाद जारी की गई रिपोर्टों में यूएन ने अनुमान लगाया है कि म्यांमार, कंबोडिया और लाओस में ऐसे परिसरों में लाखों लोग फंसे हो सकते हैं, जहां कथित तौर पर उन्हें धमकियों, यातनाओं और शारीरिक शोषण के तहत निवेश, किप्टोकरेंसी और रोमांस से जुड़े स्कैम चलाने के लिए मजबूर किया जाता है।

अधिकारी ने बताया, “जांच में सामने आया कि तीनों अगस्त 2025 में बैंकॉक और फिर म्यांमार गए थे। केके पार्क में, उन्हें साइबर स्कैम करने के लिए मजबूर किया गया, जिनमें शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, टास्क फ्रॉड, रोमांस फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड शामिल थे। जब वे उस परिसर में मौजूद बड़े-बड़े कॉल सेंटरों में दबाव में काम कर रहे थे, तो उन्हें अपने काम के बदले बहुत कम सैलरी मिलती थी। इसी दौरान तीनों की आपस में जान-पहचान हुई और उन्होंने एक-दूसरे के नंबर ले लिए।”

पुलिस के मुताबिक, म्यांमार और उसके बाहर के अधिकारियों की ओर से की गई एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई के बाद ये तीनों भारत लौट आए, इस दौरान दिसंबर और जनवरी के माह में हजारों पुरुषों और महिलाओं को बचाया गया और उनके देश वापस भेजा गया था।

भारत आने के बाद बनाया गिरोह

एक अन्य अधिकारी ने बताया, “भारत आने के बाद तीनों ने नेरुल में मिलकर एक समूह बनाया और केके पार्क से चलाए जा रहे रैकेट से जुड़े कुछ संदिग्धों के साथ मिलकर ऑनलाइन स्कैम करना शुरू कर दिया। उनकी योजना एक बड़ा साइबर क्राइम ऑपरेशन खड़ी करने की थी। जांच के दौरान की गई तलाशी में पता चला की संदिग्धों ने अपने अपराध में असली कारोबार जैसा दिखाने के लिए कुछ डोमेन नेम खरीद रखे थे। उनकी योजना मुंबई के पास, कर्जत इलाके में किसी फॉर्महाउस से अपना ऑपरेशन चलाने की भी थी, जिसके लिए उन्होंने कुछ जगहों को चुनाव भी कर लिया था। जिस जगह को वे अपने अपराध से कमाए पैसों से खरीदने वाले थे, उसके लेआउट पर भी उन्होंने काम शुरू कर दिया था, तभी हमने उन्हें पकड़ लिया।”

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