महाराष्ट्र में पुलिस स्टेशन के निर्माण के लिए नए नियम लागू होंगे। इन नियमों के तहत अब अपराध के आधार पर पुलिस बल का निर्धारण होगा। नए नियमों के तहत, बृहन्मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर बने नए पुलिस स्टेशनों को A, B या C श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा जिससे उनकी संख्या निर्धारित होगी।
1960 में तैयार किए गए स्टाफिंग ढांचे से हटकर, महाराष्ट्र ने पुलिस बल और नए पुलिस स्टेशनों के निर्माण के लिए अपने मानदंडों को संशोधित किया है। जिसके तहत पुलिस की संख्या को अपराध के स्तर, जनसंख्या और किसी क्षेत्र में आवश्यक पुलिसिंग से जोड़ा है। सरकार ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और अपराध की बदलती परिस्थितियों जिनमें साइबर अपराध में वृद्धि भी शामिल है उनके कारण पुरानी व्यवस्था अपर्याप्त हो गई थी।
नए पुलिस स्टेशन के लिए ये होंगे अनिवार्य मानदंड
यह संशोधन बॉम्बे हाई कोर्ट के उन निर्देशों के बाद किया गया है जिनमें राज्य के 2023 के मानदंडों पर पुनर्विचार करने और पुलिस स्टेशनों की स्थापना तथा उनके लिए आवश्यक मानव संसाधन पर एक व्यापक नीति तैयार करने को कहा गया था। संशोधित प्रस्ताव अक्टूबर 2025 में प्रस्तुत किया गया था। प्रस्तावित क्षेत्राधिकार में पिछले तीन वर्षों में दर्ज अपराध एक नए पुलिस स्टेशन के लिए अनिवार्य मानदंड होगा जिसे कम से कम सात से आठ निर्धारित शर्तों को भी पूरा करना होगा।
नए पुलिस स्टेशनों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा
नए पुलिस स्टेशनों को A, B या C श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। A श्रेणी के स्टेशनों में जिला मुख्यालय, प्रमुख तीर्थस्थल या पर्यटन केंद्र और भारतीय दंड संहिता के भाग I से V के अंतर्गत 400 से अधिक अपराध दर्ज करने वाले स्टेशन शामिल होंगे। B श्रेणी में तालुका मुख्यालय, 200 से 400 ऐसे अपराध दर्ज करने वाले स्टेशन, 1000 से अधिक औद्योगिक श्रमिकों वाले क्षेत्र, प्रमुख रेलवे स्टेशन और ऐसे स्थान शामिल होंगे जहां अक्सर विरोध प्रदर्शन या भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की आवश्यकता होती है। C श्रेणी में 150 से 200 अपराध दर्ज करने वाले स्टेशन शामिल होंगे।
किस श्रेणी के थाने में होंगे कितने पुलिसकर्मी?
कर्मचारियों की संख्या भी क्षेत्राधिकार के अनुसार अलग-अलग होगी। मुंबई के बाहर किसी आयुक्त कार्यालय में, ए श्रेणी के थाने में 166 कर्मी होंगे और बी श्रेणी के थाने में 149 पुलिसकर्मी। जिला पुलिस अधीक्षक के अधीन, ए, बी और सी श्रेणियों के थाने के लिए ये संख्या क्रमशः 146, 134 और 100 पुलिसकर्मियों की है जिसमें अवकाश, प्रशिक्षण और आकस्मिक खर्चों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित राशि भी शामिल है।
मुंबई इस श्रेणी से बाहर है। उच्च जनसंख्या घनत्व और अपराध के बदलते स्वरूप का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि मुंबई के सभी मौजूदा पुलिस स्टेशन पहले से ही ए श्रेणी में आते हैं। मुंबई में नए पुलिस स्टेशन के लिए कर्मचारियों की अधिकतम संख्या 362 निर्धारित की गई है। गढ़चिरोली और गोंडिया को भी इस वर्गीकरण से बाहर रखा गया है क्योंकि वहां नक्सलवाद से संबंधित पुलिसिंग की अलग-अलग आवश्यकताएं हैं और नए पुलिस थानों के लिए एक अलग जनशक्ति मानक निर्धारित है।
सरकार ने कहा कि समर्पित साइबर पुलिस स्टेशनों में एक अलग स्टाफिंग ढांचा होगा जिसमें वित्त विभाग की मंजूरी के अधीन विशेष तकनीकी और आईटी योग्यता रखने वाले कर्मी होंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया है कि ए, बी या सी श्रेणी के कितने नए स्टेशन बनाए जाएंगे।
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री फड़नवीस की बढ़ी ताकत
महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने ऐसे नए नियम बनाए हैं, जिनके तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस किसी भी मंत्री के लिए गए फैसले को पलट सकते हैं, बशर्ते मुख्यमंत्री यह कदम जनहित में उठाएं और ऐसा करने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करें। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
