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नासिक हादसाः अपनों को बचाने के लिए लाशों के पास से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर भागने लगे लोग, मच गई थी अफरा-तफरी

महाराष्ट्र के नासिक स्थित जाकिर हुसैन अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक में लीकेज के चलते 24 मरीजों की मौत हो गई। इस घटना में मारे गए पीड़ितों के परिजनों ने बयां की दर्दनाक दास्तां।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नासिक | Updated: April 22, 2021 9:53 AM
Maharashtra. Gas Leakमहाराष्ट्र के नासिक स्थित जाकिर हुसैन अस्पताल के मेन ऑक्सजीन टैंक में लीकेज से 24 मरीजों की जान चली गई। (एक्सप्रेस फोटो)

महाराष्ट्र के नासिक स्थित जाकिर हुसैन अस्पताल में बुधवार को ऑक्सीजन लीकेज की घटना में 24 लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इस बीच अस्पताल में मौजूद कुछ लोगों ने ऑक्सीजन सप्लाई रुकने के दौरान के डरावने घटनाक्रम को बयां किया है। इनमें एक 23 साल के शख्स विक्की जाधव ने कहा है कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से एक घंटे के अंदर ही आंखों के सामने कई लोगों के मर जाने की घटना डरावनी थी। लेकिन इस बीच लोगों को मरे हुए मरीजों के बिस्तर से ऑक्सीजन सिलेंडर छीनकर अपने परिजनों को बचाने की कोशिश करते देखना और भी डरावना था।

विक्की जाधव के मुताबिक, ऑक्सीजन लीकेज की घटना की वजह से सप्लाई रुक गई थी, जिसमें उसकी 65 वर्षीय दादी सुगंधा थोराट का भी निधन हो गया। वे ऑक्सीजन की कमी की वजह से काफी गंभीर स्थिति में थीं। उनका सैचुरेशन लेवल 38 तक पहुंच गया था। जाधव ने बताया कि जब वह सुबह 10 बजे दादी से मिलने अस्पताल पहुंचा, तो उसे पता चला कि उन्हें ऑक्सीजन नहीं दिया जा रहा। इसके बाद उसने अस्पताल के स्टाफ से मदद मांगी और उन्हें सिस्टम को चेक करने के लिए कहा। इसी के बाद ऑक्सीजन टैंक में लीक मिला।

जाधव का कहना है कि लीक मिलने के बाद अस्पताल के तीसरे फ्लोर पर हड़कंप मच गया, क्योंकि यहां पर सभी गंभीर मरीज भर्ती थे। इसके चलते अस्पताल का स्टाफ जल्दबाजी में बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर निकालने लगा, ताकि मरीजों की मदद की जा सके। हालांकि, ये सिलेंडर ऑक्सीजन टैंक का विकल्प नहीं थे। ऐसे में कई मरीजों की सांस की कमी की वजह से मौत हो गई।

इसके बाद जब मरीजों के परिजन वॉर्ड में पहुंचे तो उन्हें ऑक्सीजन लीकेज की बात पता चली। इसी दौरान बाकी गंभीर मरीजों के परिजनों ने ऑक्सीजन की कमी से जान गंवा चुके लोगों के ऑक्सीजन सिलेंडर उठाने शुरू कर दिए। कई लोगों ने तो अपने गंभीर परिजनों को बेड से उठाकर निजी वाहन और रिक्शा में बैठाकर दूसरे अस्पताल पहुंचाने की भी कोशिश की। लेकिन कुछ और लोग ऐसा नहीं कर पाए।

जाधव का कहना है कि वे इस घटना के लिए अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों को दोषी नहीं ठहरा सकते, क्योंकि उनसे जो हो सकता था उन्होंने किया। लेकिन उनका गुस्सा प्रशासन के खिलाफ है, जिसने अपने सिस्टम के सुरक्षित होने तक की बात सुनिश्चित नहीं की।

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