ताज़ा खबर
 

महाराष्ट्र: 701 किलोमीटर एक्सप्रेसवे के लिए काट डाले डेढ़ लाख पेड़, 2 लाख 76 हजार तक काटने की तैयारी

एनजीओ वनशक्ति डी. स्टालिन का कहना है कि पेड़ों की कटाई के बदले जो पेड़ लगाए जाएंगे, वह उतने प्रभावी नहीं होंगे, क्योंकि नए पेड़ तुरंत फायदा नहीं देंगे।

samruddhi expresswayपर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के दिनों में इतने बड़े स्तर पर कभी पेड़ों की कटाई नहीं हुई है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

महाराष्ट्र सरकार मुंबई से नागपुर के बीच करीब 701 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बना रही है। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद दोनों शहरों के बीच का यातायात काफी सुगम हो जाएगा। हालांकि महाराष्ट्र सरकार के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट के चलते करीब 2 लाख पेड़ काटे जाएंगे, जो कि पर्यावरण के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। मुंबई मिरर की एक खबर के अनुसार, प्रोजेक्ट की स्टेट्स रिपोर्ट की मानें तो 3 जून को हुई रिव्यू मीटिंग में कहा गया है कि अभी तक एक्सप्रेसवे के लिए 1,53,744 पेड़ काटे जा चुके हैं। जबकि कुल 2,76,050 पेड़ काटे जाने हैं।

इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के काटे जाने पर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता जाहिर की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के दिनों में पर्यावरण की यह सबसे बड़ी क्षति है। मुंबई-नागपुर एक्सप्रेस वे का निर्माण महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) द्वारा किया जा रहा है। इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई पर MSRDC का दावा है कि वह इस नुकसान के बदले 8 लाख पेड़ लगाएगी। साथ ही द वाइल्डलाइफ सेंचुरी ऑफ इंडिया, द बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया और फोरेस्ट डिपार्टमेंट पौधारोपण के अगले 7 सालों तक इन पेड़ों की देखभाल करेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ ग्रोथ कर सकें।

MSRDC का कहना है कि इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों के मुताबिक प्रत्येक एक किलोमीटर के इलाके में 583 पेड़ लगाए जाने चाहिए, जबकि हम प्रत्येक किलोमीटर के इलाके में 650 पेड़ लगाएंगे। महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन का कहना है कि हमने पौधारोपण के लिए योजना बनाना भी शुरु कर दिया है और यह योजना अगले मानसून तक लागू कर दी जाएगी। साथ ही एमएसआरडीसी पौधारोपण में स्थानीय पेड़ों को तरजीह देगी, ताकि उनके उगने की संभावना ज्यादा रहे। साथ ही एमएसआरडीसी इन पेड़ों के लिए सिंचाई की भी व्यवस्था करेगी। एनजीओ वनशक्ति डी. स्टालिन का कहना है कि पेड़ों की कटाई के बदले जो पेड़ लगाए जाएंगे, वह उतने प्रभावी नहीं होंगे, क्योंकि नए पेड़ तुरंत फायदा नहीं देंगे। डी.स्टालिन का कहना है कि पौधारोपण के बावजूद 20 सालों तक पर्यावरण का नुकसान झेलना पड़ेगा। साथ ही सरकार इन पेड़ों को रोजाना 8 लाख लीटर पानी कहां से उपलब्ध कराएगी? बता दें कि मुंबई-नागपुर के बीच बनने वाला एक्सप्रेस वे साल 2021 तक बनकर तैयार हो जाएगा।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 मुख्यमंत्री के बंगले को नगर निगम ने डिफाल्टर की सूची में डाला, 7 लाख रुपये पानी बिल का बकाया
2 अलीगढ़ में कचौड़ी वाला निकला करोड़पति, जांच करने वाले अधिकारी भी हैरान
3 गैर गांधी’ कांग्रेस प्रमुख पर मणिशंकर अय्यर का बयान, कहा- ‘गांधी मुक्त कांग्रेस’ ही भाजपा का लक्ष्य
ये पढ़ा क्या?
X