महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में बड़ा फैसला लिया है। इसके मुताबिक, राज्य में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी भाषा का टेस्ट देना होगा। इसके साथ ही उनके परमिट की भी समीक्षा की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, मीरा-भायंदर में इसे लेकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने पर कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, “सरकार मानो अपना ही पतन करने पर तुली हुई है। हम भारतीय हैं और हमारे राष्ट्र की पहचान भाषाओं, धर्मों और जातियों की विविधता में निहित है। भाषा के आधार पर महाराष्ट्र को तोड़ना और उसकी विरासत को नष्ट करना एक मूर्खतापूर्ण विचार है।”

वहीं, दूसरी ओर इस फैसले का समर्थन करते हुए शिवसेना नेता शाईना एनसी ने कहा, “हर राज्य की अपनी भाषा होती है। इसे कर्नाटक और तमिलनाडु की तरह अनिवार्य किया जाना चाहिए। चाहे हम स्कूलों में मराठी पढ़ाएं, ऑटो रिक्शा चालकों को पढ़ाएं या टैक्सी चालकों को, यह उस राज्य में अनिवार्य है जहां सर्विस प्रोवाइडर यात्रियों तक पहुंचता है।”

ऑटो चालकों को मराठी भाषा की परीक्षा देनी होगी

आरटीओ द्वारा मीरा रोड और भायंदर में चल रहे 12,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड ऑटो और टैक्सी चालकों के परमिट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जांच की जा रही है। डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन करने के साथ ही चालकों को मराठी भाषा की परीक्षा भी देनी होगी ताकि उनकी भाषा पर पकड़ साबित हो सके।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने सोमवार को बताया था कि यह कार्रवाई मीरा-भायंदर से बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की शिकायत के बाद शुरू की गई थी। मेहता ने मुख्यमंत्री देनेंद्र फड़नवीस के सामने लाइसेंस, बैज और परमिट जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। उनका आरोप था कि मीरा-भायंदर में नए आए प्रवासियों को जल्दबाजी में परमिट दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “दस्तावेजों की जांच के साथ ड्राइवरों को मराठी टेस्ट भी देना होगा। महाराष्ट्र दिवस तक रिपोर्ट आने के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।”

मुंबई और उपनगरों में करीब 3 लाख ऑटो और टैक्सी परमिट धारक हैं, जिनके तहत लगभग 5 लाख ड्राइवर अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। यह अभियान 1 मई, महाराष्ट्र दिवस तक चलेगा जिसके बाद आरटीओ अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट के निष्कर्षों के आधार पर पूरे राज्य में इसी तरह की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

मध्य प्रदेश के बोरसर में गाली देने पर 500 रुपये जुर्माना

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव ने एक अनोखी और सराहनीय पहल शुरू की है। यहां ग्राम पंचायत ने मिलकर एक ऐसा नियम बनाया है जिससे गांव का माहौल बेहतर बन सके। अब अगर कोई व्यक्ति गाली देता हुआ पकड़ा जाता है तो उसे 500 रुपये का जुर्माना देना होगा या फिर एक घंटे तक गांव की सफाई करनी होगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें