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लॉकडाउन में महाराष्ट्र में मीडिया पर चला सरकारी डंडा, 15 मामलों में पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज

महाराष्ट्र में कोरोना पर प्रशासन की कमियों को उजागर करने वाले करीब दर्जन भर पत्रकारों को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा गया है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र मुंबई | Updated: August 7, 2020 1:21 PM
Maharashtra, CM Uddhav Thackerayमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे। (एक्सप्रेस फोटो)

देश में कोरोनावायरस के बढ़ते केसों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों की महामारी को रोकने की कोशिशों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच कई राज्यों ने कोरोना से जुड़ी गलत खबरों के जरिए फैल रहे डर को खत्म करने के लिए प्रावधान भी बनाए हैं। पर महाराष्ट्र सरकार ने तो अपनी कमी उजागर करने वाले पत्रकारों की ही आवाजें दबानी शुरू कर दी है। अब तक 15 ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां महाराष्ट्र सरकार ने अपने खिलाफ खबर चलाने वाले प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन पोर्टल के पत्रकारों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए हैं। वह भी लॉकडाउन के पहले महीने यानी मार्च में ही।

द वायर न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, करीब दर्जनभर पत्रकारों को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा गया है। कुछ अन्य केसों में पत्रकारों पर मानहानि तक के केस किए गए हैं, जिनमें लाखों रुपए के हर्जाने की मांग की गई। इसके अलावा एक ही रिपोर्टर या संपादक के खिलाफ एक से ज्यादा केस भी दर्ज किए गए हैं। इन सब मामलों में जो एक बात सामान्य रही है, वह यह है कि सभी की रिपोर्ट्स राज्य में कोरोना के हालात पर थीं। रिपोर्टर्स का दावा है कि राज्य सरकार ने प्रशासन को पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए खुली छूट दे रखी है।

बताया गया है कि मार्च से ही पुलिस ने अब तक लॉकडाउन के नियम तोड़ने के लिए 1.3 लाख केस दर्ज किए हैं और करीब 28 हजार लोग जेल भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद राज्य में संक्रमितों की संख्या अब 5 लाख के करीब पहुंच चुकी है, जबकि 16,792 लोगों की जान भी गई है।

पत्रकारों को न्याय दिलाने की मांग के साथ सड़कों पर उतर रहे साथी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने एबीपी माझा के पत्रकार राहुल कुलकर्णी को अप्रैल में एक रिपोर्ट दिखाने के लिए गिरफ्तार कर लिया था। उनके साथ 11 अन्य रिपोर्टरों को अरेस्ट किया गया। सभी पर प्रवासी मजदूरों के लिए की गई ट्रेन सेवा से जुड़ी एक अपुष्ट फुटेज चलाने का आरोप लगाया गया। इसमें दावा किया गया था कि बांद्रा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन चलाए जाने की बात सुनकर तीन हजार मजदूर जुट गए। राहुल कुलकर्णी की यह सूचना दक्षिण-मध्य रेलवे के अधिकारियों की चिट्ठी पर आधरित थी। हालांकि, पुलिस ने उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए आईपीसी की पांच अलग-अलग धाराओं के साथ एपिडेमिक एक्ट की धारा 3 के तहत केस दर्ज किया था।

इसके अलावा दिव्य मराठी अखबार के औरंगाबाद एडिशन के उपसंपादक, रिपोर्टर और फोटोग्राफर पर भी 24 और 25 जून की रिपोर्ट्स के लिए केस हुआ था। इसमें अखबार ने प्रशासन की कमियों को उजागर किया था। हालांकि, इस मामले के बाहर आने के बाद औरंगाबाद की पत्रकार एसोसिएशन ने विरोध दर्ज कराया और पूरे शहर में प्रदर्शन किया। करीब 108 रिपोर्टरों ने डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के घर तक मार्च निकाला। अब राज्य के गृह विभाग ने इस मामले को फिर से देखने की बात कही है।

राज्य में मई में ही टीवी9 मराठी चैनल के एक रिपोर्टर राहुल जोरी के खिलाफ भी केस दर्ज हो चुका है। बताया जाता है कि इस रिपोर्टर ने महाराष्ट्र में रिलीफ कैंप के नाम पर चल रही अनियमितताओं का खुलासा किया था। रिपोर्टर के खुलासे के मुताबिक, धुले शिरपुर तालुका में पड़ने वाले हदाखेड़ गांव में एक राहत कैंप सिर्फ कागजों पर ही था, जबकि असम में इसका अस्तित्व ही नहीं था। इस पर गांव के तहसीलदार आबा महाजन ने जोरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

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