सिख संगठनों के विरोध के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने तख्त श्री हजूर साहिब को लेकर प्रस्तावित कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। फड़नवीस सरकार ने इस मामले में बातचीत और परामर्श के लिए एक समिति गठित करने की बात कही है।
पंजाब के सिख नेताओं और संस्थाओं का कहना था कि तख्त श्री हजूर साहिब के धार्मिक और प्रशासनिक मामलों में किसी भी तरह का अनावश्यक दखल नहीं होना चाहिए।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने महाराष्ट्र सरकार के इस कदम को गुरुद्वारा प्रबंधन के कामकाज में सीधा दखल बताया था और कहा था कि तख्त की परंपराओं, प्रशासन और स्वायत्तता से संबंधित कोई भी फैसला सिख संस्थानों, तख्त के जत्थेदारों और एसजीपीसी से परामर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए।
हरसिमरत ने लिखा था फड़नवीस को पत्र
शिरोमणि अकाली दल की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फड़नवीस से अपील की थी कि वह तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड की स्वायत्ता को बनाए रखें। बादल ने इसे लेकर फड़नवीस को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था कि बोर्ड के स्वरूप में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे सिख समुदाय में रोष है। कांग्रेस के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इस मामले में आपत्ति जताई थी।
बीजेपी नेताओं के साथ हुई बैठक
इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और भाजपा नेताओं के बीच बैठक हुई थी। बैठक में पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी इस प्रस्तावित कानून को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी। केवल सिंह ढिल्लों ने भी कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र की सरकार से स्पष्ट रूप से कहा था कि तख्त श्री हजूर साहिब के प्रशासन से जुड़े किसी भी कानून को अंतिम रूप देने से पहले सिख संस्थाओं से बातचीत जरूर की जानी चाहिए।
ढिल्लों ने कहा कि सिख समुदाय की चिताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के लिए हम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। दिल्ली बीजेपी के नेता आरपी सिंह भी इस बैठक में मौजूद थे।
क्या है यह पूरा मामला?
महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल द्वारा 22 जून को ‘नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अचलनगर साहिब अधिनियम, 1956’ को रद्द करने और एक नया कानून लाने का फैसला लिया गया था। इस प्रस्तावित कानून में तख्त श्री हजूर साहिब के बोर्ड में सरकारी प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही गई है। प्रस्तावित कानून का नाम तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब गुरुद्वारा अधिनियम है।
सिख नेताओं का कहना था कि प्रस्तावित कानून महाराष्ट्र सरकार को 17 सदस्यीय बोर्ड में 12 सदस्यों को मनोनीत करने की अनुमति देगा जबकि एसजीपीसी का प्रतिनिधित्व चार सदस्यों से घटकर दो हो जाएगा।
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उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच हुआ छोटा सा झगड़ा बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल बन गया है। पंजाब और उत्तराखंड दोनों राज्यों में अगले कुछ महीनों के भीतर विधानसभा के चुनाव होने हैं और उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार होने के चलते उसके सामने इस मामले में चुनौतियां ज्यादा हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
