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300 किलो की इस महिला ने 2 महीने में घटाया 214 kg वजन, कभी सोफे पर बैठाकर 20 लोग ले गए थे अस्पताल

पुणे की एक महिला जिसका वजन 300 किलो था, सर्जरी के माध्यम से 86 किलो कर दिया गया है। महिला ने अपना इलाज भारत से लेकर यूके तक के डॉक्टरों से कराया था लेकिन अंत में पुणे में उसका सफल इलाज हुआ।

अमिता रजानी ने सर्जरी के माध्यम से अपना वजन 300 किलो से 86 किया है फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

(मृणालिका सिंह और शिवांगना चतुर्वेदी)

बेरियाट्रिक सर्जरी के द्वारा अमिता रजानी ने अपना वजन 300 किलोग्राम से घटाकर 86 किलोग्राम कर लिया है। इसके बाद वह अब वजन घटाने की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली एशिया की सबसे भारी महिला के रूप में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम शामिल होने का इंतजार कर रही है। अमिता के मुताबिक उन्होंने अपना वजन कम करने के लिए भारत से लेकर यूके तक में अपना इलाज कराया था लेकिन पुणे के एक डॉक्टर को उनका वजन कम करने में सफलता हासिल हुई।

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क्या बोलीं अमिता रजानी: बेरियाट्रिक सर्जरी से अपना वजन 300 किलोग्राम से घटाकर 86 किलोग्राम करने वाली अमिता रजानी ने कहा कि एक दशक पहले, मैं मोटापे की वजह से बेहोश हो गई थी। पहली बार जब वह घर से बाहर निकलीं तो अस्पताल ही उनकी यात्रा थी। अमिता ने आगे कहा, “एक बार जब मैं बिस्तर से गिर गई, तो मुझे वापस बैठने में छह आदमी और तीन घंटे लगे।” एक एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई थी जिसमें मुझे अस्पताल ले जाने के लिए एक बड़ा सोफा लगाया गया था। बकौल अमिता 16 साल की उम्र में, मेरा वजन 126 किलो था और नियमित कार्यों को करने में काफी मुश्किल होती थी। अमिता की मां ने कहा कि उसे वॉशरूम जाने और अन्य काम करने के लिए दूसरों की मदद की आवश्यकता होती है, जो सामान्य लोग अपने आप पर कर सकते हैं। हमने एक समय पर आशा खो दी थी।

 

अमिता को भारत और यूके के प्रमुख एंडोक्रिनोलॉजिस्टों को दिखाया गया था लेकिन वे मोटापे के सटीक कारण का पता नहीं लगा सके। हालांकि, महाराष्ट्र के पुणे में जाने-माने बेरियाट्रिक सर्जन डॉ शशांक शाह ने अमिता की मदद की और दो महीने के अंदर ही उसकी पूरी जांच  कर मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, किडनी, टाइप 2 डायबिटीज़ और सांस लेने जैसी समस्याओं का को दूर कर दिया। डॉक्टर शाह के मुताबिक, यह एक बड़ा जोखिम वाला मामला था लेकिन हम इसकी सफलता को लेकर आश्वस्त थे। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में केवल आधा घंटा लगा और सर्जरी के कुछ ही घंटों के भीतर अमिता अपने पैरों पर चल रही थी।

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