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शिवसेना ने बताए महाराष्ट्र में सरकार गठन के 5 तरीके और उनका असर, जानें क्या हैं ये फॉर्मूले

शिवसेना को छोड़ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने की हैसियत से सरकार बनाने के लिए दावा पेश कर सकती है। बीजेपी के पास 105 विधायक हैं। 40 और की जरूरत पड़ेगी। लेकिन इस आंकड़े को हासिल करना बीजेपी के लिए असंभव है।'

शिवसेना नेता संजय राउत (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

Maharashtra Elections Results 2019 के ऐलान के करीब दो हफ्ते बाद भी सरकार गठन को लेकर पेंच फंसा हुआ है। शिवसेना और बीजेपी में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही तनातनी के बीच बहुमत होने के बावजूद एनडीए सरकार नहीं बना पा रहा है। इसी बीच दोनों दलों के बीच बयानबाजी भी लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच शिवसेना के मुखपत्र सामना में पार्टी के सांसद संजय राउत ने राज्य की सियासी परिस्थितियों पर एक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने सरकार गठन के पांच समीकरण और उनका असर बताया है।

पहली स्थितिः राउत ने लिखा है, ‘शिवसेना को छोड़ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने की हैसियत से सरकार बनाने के लिए दावा पेश कर सकती है। बीजेपी के पास 105 विधायक हैं। 40 और की जरूरत पड़ेगी। लेकिन इस आंकड़े को हासिल करना बीजेपी के लिए असंभव है।’

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दूसरी स्थितिः विधानसभा चुनाव 2014 के बाद बनी स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने लिखा, ‘एनसीपी, बीजेपी को समर्थन देगी, इसके बदले पवार की बेटी सुप्रिया सुले को केंद्र में और भतीजे अजीत पवार को राज्य में पद दिया जा सकता है। लेकिन पवार 2014 में की गई भयंकर भूल दोहराएंगे इसकी संभावना बहुत कम है। यदि पवार ऐसा करते हैं तो उनके कद को बड़ा झटका लगेगा।’

तीसरी स्थितिः बीजेपी विश्वासमत प्रस्ताव में बहुमत सिद्ध करने में नाकाम होगी तब दूसरी बड़ी पार्टी होने के नाते शिवसेना सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। ऐसे में एनसीपी (54 सीटें), कांग्रेस (44 सीटें) और अन्य की मदद से बहुमत का आंकड़ा 170 तक पहुंच जाएगा। शिवसेना अपना खुद का मुख्यमंत्री बना सकेगी। इसके लिए तीन स्वतंत्र विचारों वाली पार्टियों को समान अथवा सामंजस्य से योजना बनाकर आगे बढ़ना होगा।’ राउत ने इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार का उदाहरण भी दिया।

चौथी स्थितिः राउत ने बीजेपी को अहंकारी बताते हुए लिखा, ‘बीजेपी-शिवसेना को एक साथ आना होगा। इसके लिए दोनों को ही चार कदम पीछे लेने पड़ेंगे। बीजेपी को शिवसेना की मांगों पर विचार करना पड़ेगा और मुख्यमंत्री पद का विभाजन (ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला) करना होगा और यही एक बेहतरीन तरीका है, लेकिन अहंकार के चलते यह संभव नहीं है।’

पांचवीं स्थितिः राउत ने लिखा, ‘बीजेपी ईडी, पुलिस और पैसे के दम पर बाकी पार्टियों के विधायक तोड़कर सरकार बनाए। लेकिन दल बदलने वालों की क्या हालत हुई, इसे मतदाताओं ने पहले ही दिखा दिया। फूट डालकर बहुमत हासिल करना और मुख्यमंत्री पद पाना आसान नहीं है। इन सबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल होगी।’

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