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प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए विशेष ट्रेन चलाए केंद्र सरकार, सीएम उद्धव ठाकरे की मांग- अप्रैल के अंत में जारी हो गाइडलाइन

केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के मद्देनजर 20 अप्रैल से कुछ क्षेत्रों में छूट देने का ऐलान किया था, हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और पुणे से यह छूट पूरी तरह खत्म कर दीं।

, Translated By कीर्तिवर्धन मिश्र मुंबई | April 22, 2020 9:58 AM
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे।

देशभर में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच आने वाले समय में भी लॉकडाउन में छूट के आसार बेहद कम नजर आ रहे हैं। खासकर उन राज्यों में जहां संक्रमितों की संख्या कई गुना तेजी से बढ़ रही है। इनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु सबसे आगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह राज्य में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनों का इंतजाम करे। दरअसल, महाराष्ट्र में लॉकडाउन में फंसे दिहाड़ी मजदूरों के पास कमाई का कोई स्थायी स्रोत न होने की वजह से वे कई बार सड़कों पर प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर चुके हैं।

हाल ही में सैकड़ों की संख्या में मजदूर मुंबई के बांद्रा में जुट गए थे। उनकी मांग थी कि उन्हें अपने घर भेजने की व्यवस्था की जाए। हालांकि, अफसरों के समझाने के बाद वे अपने घर लौट गए थे। उद्धव ने मजदूरों को घर लौटाने की मांग मंगलवार को कोरोनावायरस संकट की गंभीरता की निगरानी कर रहे मंत्रियों के सामने भी उठाई। उन्होंने मंत्रियों से मांग की कि केंद्र सरकार को राज्य सरकारों की पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) और वेंटिलेटरों की मांग को भी जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनके लिए खाद्यान्न बांटने के नियमों को आसान किया जाना चाहिए।

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गौरतलब है कि केंद्र सरकार की तरफ से लॉकडाउन में 20 अप्रैल से कुछ छूट देने का ऐलान किया गया था। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और पुणे से इन छूटों को पूरी तरह से हटा लिया। केंद्रीय सरकार की टीम की तरफ से इन दोनों शहरों में कोरोनावायरस संक्रमण की स्थिति और लॉकडाउन उल्लंघन पर चिंता जाहिर की गई थी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, उद्धव ने मंत्रियों को बैठक में राज्य सरकार की तैयारियों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 6 लाख प्रवासी मजदूरों के लिए खाने और रहने के साथ बाकी व्यवस्थाएं भी की हैं। हालांकि, इसके बावजूद कुछ मजदूर अपने घर जाना चाहते हैं। इसे लेकर वे (मजदूर) कुछ मौकों पर आक्रामक भी हुए हैं। अगर केंद्र सरकार को लगता है कि 30 अप्रैल से 15 मई के बीच कोरोनावायरस के मामले बढ़ सकते हैं, तो केंद्र को देखना चाहिए कि वह कुछ स्पेशल ट्रेनों के जरिए मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने का इंतजाम कर सकता है। इस मामले में अप्रैल के अंत तक गाइडलाइंस भी जारी हो जानी चाहिए।

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