महाराष्ट्र में 30 मई से मराठा आरक्षण के लिए प्रदर्शन फिर से शुरू होने वाला है। इसी के मद्देनजर राज्य सरकार में भाजपा कोटे से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शुक्रवार को दोहराया कि जब उन्हें पूर्ण विश्वास है कि मराठा आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे पाटिल को पता चलेगा की महाराष्ट्र की सरकार ने मराठा आरक्षण के लिए क्या-क्या किया है तो अपना आंदोलन वापस ले लेंगे। इस बयान के एक दिन पहले भाजपा नेता प्रसाद लाड ने मराठा आरक्षण नेता जरांगे पाटिल से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा, “हम मुद्दों पर उनसे चर्चा करेंगे, गलफहमियों को दूर करेंगे और मुझे विश्वास है कि एक बार जब उन्हें सरकार का पक्ष समझ आएगा तो वे खुद विरोध नहीं करेंगे।”
मनोज जरांगे पाटिल से करेंगे चर्चा
शुक्रवार दोपहर को भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मनोज जरांगे पाटिल से मिलकर उनसे उनकी मांगों पर चर्चा करेगा, इस प्रतिनिधिमंडल में राधाकृष्ण पाटिल और प्रसाद लाड शामिल रहेंगे। जरांगे पाटिल ने गुरुवार को शुक्रवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा करते हुए कहा, “अगर इस भीषण गर्मी में विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी सेहत बिगड़ती है तो इसके जिम्मेदार महाराष्ट्र सरकार की होगी।”
जरांगे पाटिल एक बार फिर से जारी किए गए प्रमाणपत्रों में विसंगतियों, लंबित प्रमाणपत्रों को जारी करने में देरी और कुनबी रिकार्ड का पता लगाने के लिए संदीप शिंदे समिति को एक और साल का विस्तार देने कारण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
‘अधिकारी कर रहे प्रकिया में देरी’
हैदराबाद गजट से जुड़ी एक और समस्या के बारे में बात करते हुए राधाकृष्ण ने कहा, “हैदराबाद गजट में नाम नहीं बल्कि सिर्फ नंबर दिए गए हैं, ऐसे में ऐतिहासिक रिकार्ड के आधार पर रिश्तों को साबित करने एक मुश्किल काम बन गया है।” उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर लापरवाही बरती जा रह है और कुछ अधिकारी जानबूझकर इस प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं।
सरकार ने आरक्षण के कार्यान्वयन और कुनबी प्रमाण पत्रों के वितरण की निगरानी के लिए एक उप-समिति भी गठित की है। उन्होंने कहा, “किसी ने उन्हें 58 लाख प्रविष्टियों का मुद्दा नहीं है। आरक्षण पूरे राज्य में लागू है। मराठावाड़ा में 2.5 लाख से अधिक कुनबी प्रमाण पत्र दिए गए हैं। सतारा गजट में भी कुछ कानूनी मुद्दे हैं।”
64 मामले ही शेष हैं- भाजपा मंत्री
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा, “95 फीसदी मामले पहले ही वापस ले लिए गए हैं। दर्ज किए गए 950 मामलों में से केवल 64 मामले ही बाकी है, क्योंकि ये मामले गंभीर धाराओं में दर्ज की गई हैं।”
यह भी पढ़ें: ‘OBC के साथ कोई अन्याय नहीं होगा…’, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का बयान
मुंबई के आजाद मैदान में आरक्षण को लेकर मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन किया था। उन्होंने सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया। मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार के मंंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा दी गई ड्राफ्ट प्रस्तावना (ड्राफ्ट रिज़ॉल्यूशन) को स्वीकार कर लिया था। उन्हें आश्वासन दिया कि हैदराबाद गजट लागू करने के लिए एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया जाएगा, जिसके बाद मराठवाड़ा के मराठाओं को कुनबी का दर्जा मिल सकता है। वहीं इसके बाद महाराष्ट्र के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता इसको लेकर चिंतित हैं। महायुती सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
