अमरावती के मेलघाट में एक सरकारी आदिवासी स्कूल के हॉस्टल में कई लड़कियों के बिना वजह रोने और हंसने की घटनाओं ने न सिर्फ इस इलाके में दहशत पैदा कर दी है बल्कि आसपास के जिलों में भी लोग डरे हुए हैं। अचानक से लड़कियों को रोने-हंसने और अजीब तरह के बर्ताव को लोगों ने भूत-प्रेत का साया बताया है। हालांकि स्टेट की मेडिकल हेल्थ टीम ने इसे डिसोसिएटिव या कन्वर्जन के लक्षण के रूप में देखा है।

मेडिकल के नजरिए से यह घटना कुछ भी हो, लेकिन भूत-प्रेत की अफवाह ने इस हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के परिवार वालों को डरा दिया है और 600 से अधिक छात्राएं हॉस्टल छोड़कर जा चुकी हैं। कुछ तो माता-पिता ही अपने बच्चों को यहां लेकर लेकर चले गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

अमरावती के मेलघाट में चिखलदरा तालुका के डोमा गांव में स्थित शासकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक आश्रम शाला के गर्ल्स हॉस्टल में 29 जुलाई के आसपास कुछ अजीब घटनाएं रिपोर्ट की गईं। इन घटनाओं में हॉस्टल में रहने वाली एक लड़की बिना किसी वजह के पहले तो जोर से रोने लगी और उसके बाद तेज-तेज हंसने भी लगी। इसके बाद कई दूसरी लड़कियों में भी ऐसे लक्षण देखने को मिले हैं।

भूत-प्रेत की अफवाह कैसे फैली?

हॉस्टल में लड़कियों के अचानक रोने और हंसने की घटनाओं को भूत-प्रेत से जोड़कर देखा जाने लगा। कई लड़कियों को लेकर तो ये भी दावा किया गया है कि वह बेहोश भी हो गई हैं। इन घटनाओं का भूत-प्रेत से कनेक्शन अफवाहों ने किया है। इस मामले की जांच करने वाली टीम ने बताया कि डोमा से करीब 50 किलोमीटर दूर एक गांव एकताई में एक औरत को लगा कि उसने कोई सुपरनैचुरल साया देखा है और उसके बाद से वह अजीब हरकतें करने लगी हैं।

उस औरत को देखने वाली एक स्टूडेंट में भी ऐसे ही लक्षण देखे गए। वह बेकाबू होकर रोने और हंसने लगी। जल्द ही स्कूल की दूसरी लड़कियों में भी यही बर्ताव दिखने लगा। जैसे-जैसे और लड़कियों में लक्षण दिखने लगे। तो लोगों ने इसे किसी अनजान बीमारी से बदलकर भूत-प्रेत के साये से जोड़ दिया।

गांवों में अफवाहें फैलने लगीं कि लड़कियों पर भूत-प्रेत का साया है और हॉस्टल भूतिया है। कहानी में कई और थ्योरी भी जुड़ गईं। एक अफवाह ने लड़कियों के बिना वजह हंसने और रोने की घटना को मोह या महुआ का पेड़ काटने से जोड़ दिया। इस पेड़ को आदिवासी पवित्र पेड़ मानते हैं। इसके अलावा एक अफवाह ये भी फैली कि पेड़ काटने के बाद पूजा नहीं की गई इसलिए ऐसा हो रहा है। स्टूडेंट्स के बीच एक हॉरर फिल्म के बारे में भी बात हुई जिसे उन्होंने देखा था और उस पर चर्चा की थी।

610 छात्राएं लौट चुकी हैं घर

भूत-प्रेत की अफवाह फैलने के बाद तो लगभग 610 छात्राएं हॉस्टल छोड़कर अपने घर लौट गई हैं। बता दें कि यह स्कूल 1979 में शुरू हुआ था, जिसमें लगभग 852 स्टूडेंट्स हैं। जब माता-पिता अपने बच्चों को घर ले जाने लगे, तो लगभग 610 स्टूडेंट्स ने रेजिडेंशियल हॉस्टल छोड़ दिया। टीचर्स ने कहा कि जब उन्होंने लड़कियों को अजीब तरह से बिहेव करते देखा तो वे भी शुरू में डर गए थे।

स्कूल में पांच साल से काम कर रहे इंग्लिश टीचर नितिन सावरकर ने कहा कि यह घटना पहले कभी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं, लेकिन वह इसका इंतजार कर रहे हैं कि कौन पहले अपने बच्चों को स्कूल भेजेगा? हमने उन सभी से एक साथ स्कूल आने को कहा।”

स्कूल में पांच साल से काम कर रहे इंग्लिश टीचर नितिन सावरकर ने कहा कि यह घटना पहले कभी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं, लेकिन वह इसका इंतजार कर रहे हैं कि कौन पहले अपने बच्चों को स्कूल भेजेगा? हमने उन सभी से एक साथ स्कूल आने को कहा।”

हेल्थ एक्सपर्ट ने इस घटना को बताया “मास हिस्टीरिया”

इन घटनाओं के सामने आने के बाद राज्य की एक हेल्थ टीम ने स्कूल का दौरा किया और एक रात स्कूल में भी बिताई। टीम ने पाया कि लड़कियां अजीब बर्ताव कर रही हैं, लेकिन टीम ने इसे भूतिया नहीं माना बल्कि कहा कि प्रभावित स्टूडेंट्स में डिसोसिएटिव या कन्वर्जन के लक्षण पाए गए हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने इस घटना को “मास हिस्टीरिया” का मामला बताया है जहां ऐसी स्थिति बनती है, जब एक समूह के कई लोग बिना किसी वास्तविक शारीरिक कारण के एक जैसी तकलीफ या डर महसूस करने लगते हैं।

डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम टीम ने छह लड़कियों की जांच के बाद एक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि लड़कियों के लगातार रोने, हंसने और उदास रहने, भूख न लगना, भूलना और याददाश्त कम होना दर्ज किया गया। लड़कियों में डिसोसिएटिव सिम्पटम्स का पता चला, लेकिन किसी भूतिया कहानी का इसमें कोई सबूत नहीं मिला।

पीड़ित लड़कियों की कहानी उनकी ही जुबानी

  1. इस घटना की पीड़ित लड़कियों ने इंडियन एक्सप्रेस से बात की तो अधिकतर लड़कियों ने बताया कि उन्हें इस तरह की घटना के दौरान उनके किए गए बर्ताव के बारे में कुछ याद नहीं है। कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली शिवानी कालसेकर ने बताया है कि वह चार साल से उस स्कूल में पढ़ रही हैं और हॉस्टल में रहती हैं। शिवानी ने बताया कि उसने टीचर्स को चक्कर आने की शिकायत तो की थी। शिवानी इस घटना के बाद घर से ही स्कूल आना-जाना कर रही हैं।

शिवानी ने बताया कि उन्हें उस घटना से जुड़ा कुछ याद नहीं है कि क्या हुआ था, मेरे साथ कौन था? शिवानी के परिजन बताते हैं कि टीचर्स से सलाह लेने के बाद उसके माता-पिता ने उसे क्लास में आते रहने को कहा है क्योंकि उसका एकेडमिक साल बहुत जरूरी है। शिवानी से जब पूछा गया कि क्या वह अब भी डरी हुई है, तो उसने कहा: “नहीं, अब क्या डरना है।”

  1. कक्षा 12वीं की एक और छात्रा जान्हवी मरास्कोल्हे ने बताया है कि वह तीन साल से इस हॉस्टल में हैं और उन्होंने दूसरी लड़कियों के साथ ऐसी घटनाओं को होते देखा है। जान्हवी ने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। जान्हवी ने कहा कि लड़कियां बिना किसी वजह के रो रही थीं और हंस रही थीं और कुछ तो बेहोश भी हो गईं। उसे याद आया कि जब उनमें से कुछ को हॉस्पिटल ले जाया गया, तो उन्हें बिस्किट दिए गए लेकिन वे खाने के बजाय बस उन्हें घूरती रहीं।

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