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अयोध्‍या: अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को पुलिस ने उठाया, अड़े धर्मगुरु

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पिछले सात दिन से आमरण अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को रविवार देर रात पुलिस ने अनशन स्थल से हिरासत में ले लिया।

Author October 8, 2018 2:42 PM
उप्र : राम मंदिर को लेकर अनशन पर बैठे परमहंस दास पुलिस हिरासत में

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पिछले सात दिन से आमरण अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को रविवार देर रात पुलिस ने अनशन स्थल से हिरासत में ले लिया। उन्हें लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधीक्षक अनिल सिसौदिया ने बताया कि महंत की हालत लगातार खराब हो रही है। उनकी पल्स रेट काफी नीचे चली गई है। लिहाजा, उन्हें आपात चिकित्सा के लिए एसजीपीजीआई लखनऊ लाया गया है। गौरतलब है कि महंत परमहंस को मनाने के लिए जिले के प्रभारी मंत्री एवं औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना रविवार रात 8.45 बजे पहुंचे थे। उन्होंने 20 मिनट तक महंत परमहंस दास से बात की। लेकिन, इस वार्ता के बाद भी महंत परमहंस ने अनशन नहीं तोड़ा।

वार्ता के बाद महंत परमहंस ने बताया कि महाना ने सोमवार दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वीडियो कॉल के जरिए बात कराने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद यदि सहमति बनती है तभी अनशन टूटेगा। इसके बाद महंत अनशन स्थल पर लेटे थे। तभी रात करीब 11.15 बजे एक एंबुलेंस सहित पुलिस की पांच गाड़ियां पहुंचीं और महंत को अनशन स्थल से उठा लिया।

गौरतलब है कि तीन दिन पहले भी संत समाज ने मोदी सरकार से कहा था कि वह राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए। बैठक के बाद महंत नृत्य गोपाल दास जी के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधि मण्डल राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद से भी मिला। राष्ट्रपति को सम्बोधित इस ज्ञापन में कहा गया है कि “महामहिम अपनी सरकार को कहें कि वह अब कानून बनाकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करें। आज की परिस्थिति में यही समाधान उपयुक्त लगता है। दिल्ली में शुक्रवार को श्री राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की अध्यक्षता में हुई संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में संतों ने एक स्वर से मोदी सरकार से कहा कि वह जन्म भूमि पर अपने वचनानुसार संसदीय कानून बना कर राम मंदिर के मार्ग की बाधाओं को दूर करे।

स्वामी वासुदेवानंद व विश्वेशतीर्थ महाराज ने तो स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री आवश्यकता पड़ने पर लोक सभा व राज्य सभा का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर कानून बनाएं और जन्म भूमि हिन्दुओं के हवाले करें। इस बैठक में रामानान्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि जो इस बिल का विरोध करेगा, देश के संत उसे उखाड़ फेकेंगे। युग पुरुष परमानंद महाराज ने भी इस मत का समर्थन करते हुए कहा कि बिल आने पर ही मालूम चलेगा कि असली राम भक्त कौन है। पूज्य डा राम विलास वेदांती, पूज्य चिदानंद पुरी (केरल), स्वामी चिन्मयानंद जी व स्वामी अखिलेश्वरानन्द जी सहित सम्पूर्ण देश से आए जगत गुरुओं महा-मंडलेश्वरों व अन्य धर्माचार्यो ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए कानून बनाने की मांग का पुरुजोर समर्थन किया।

बैठक में संतों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें मंदिर निर्माण के लिए कानून की मांग के अतिरिक्त एक जन जागरण अभियान की भी घोषणा की। इस अभियान में निम्नलिखित कार्यक्रम रहेंगे : अक्टूबर माह में स्थानीय राम भक्तों का प्रतिनिधि मंडल सभी राज्यों के राज्यपालों से मिल कर ज्ञापन देकर अनुरोध करेगा कि वे राम जन्म भूमि पर मंदिर के लिए संसदीय कानून बनाने की उनकी मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाएं।

पारित प्रस्ताव के मुताबिक नवम्बर माह में सभी संसदीय क्षेत्रों में जनसभाएं होंगीं। वहां की जनता एक बड़े और व्यापक प्रतिनिधि मंडल के साथ संतों के नेतृत्व में अपने सांसदों से मिलेगी और उन्हें संसद में कानून बनाकर राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह करेगा।

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