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वर्ल्‍ड हेरिटेज साइट पर होने वाला था श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग का प्रोग्राम, हाईकोर्ट ने रोका

यूनेस्को द्वारा ‘ग्रेट लिविंग चोल टेम्पल्स’ के तौर पर श्रेणीबद्ध किए गए प्राचीन मंदिर में दो दिन के कार्यक्रम को तमिल देसीय पेरियाक्कम जैसे तमिल समर्थक संगठनों के गुस्से का सामना करना पड़ा।

Author December 8, 2018 11:11 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

तमिलनाडु के तंजौर में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल बृहदेश्वर मंदिर में श्री श्री रविशंकर के ध्यान शिविर को तमिल समर्थक संगठनों का विरोध झेलना पड़ा। मद्रास उच्च न्यायालय ने कार्यक्रम के खिलाफ अंतरिम रोक लगा दी जिससे आयोजकों को आयोजन स्थल बदलना पड़ा। यूनेस्को द्वारा ‘ग्रेट लिविंग चोल टेम्पल्स’ के तौर पर श्रेणीबद्ध किए गए प्राचीन मंदिर में दो दिन के कार्यक्रम को तमिल देसीय पेरियाक्कम जैसे तमिल समर्थक संगठनों के गुस्से का सामना करना पड़ा। इस संगठन को माकपा तथा वीसीके जैसी पार्टियों का समर्थन हासिल है। अदालत की मदुरै पीठ की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद कार्यक्रम के लिए अंतरिम रोक को अनुमति दे दी।

अदालत ने तंजौर जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मंदिर में कार्यक्रम ना हो और उन्हें कार्यक्रम के लिए लगाई कुर्सियां और पंडाल हटाने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता एन. वेंकटेश ने अपनी याचिका में दलील दी कि अगर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई तो इससे गलत नजीर पेश होगी और भविष्य में भी ऐसे ही कार्यक्रम होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा 2016 में हुए एक कार्यक्रम के कारण यमुना के किनारे को नुकसान पहुंचाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग को जिम्मेदार ठहराने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से मंदिर पर असर पड़ेगा।

ध्यान शिविर की खबर के बाद इस बात को लेकर विवाद पैदा हो गया कि मंदिर में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए एक निजी संस्था आर्ट ऑफ लिविंग को अनुमति कैसे दी जा सकती है। यह मंदिर धरोहर स्थल है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य सरकार के एक विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। वीसीके महासचिव डी रविकुमार ने कहा, ‘कानून के तहत तंजौर मंदिर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की गुंजाइश नहीं है। यह स्थल एएसआई द्वारा संरक्षित है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। अगर अनुमति दी गई तो यह कानून के खिलाफ है।’ तमिल समर्थक संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ तंजौर में एक जुलूस निकाला लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

आर्ट ऑफ लिविंग की एक प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें हिंदू धार्मिक एवं परमार्थ निधि विभाग तथा एएसआई से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। उन्होंने कहा, ‘चूंकि मंदिरों में आध्यात्मिक प्रवचन होना सामान्य है तो इसलिए यहां कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था।’ आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से एक बयान में कहा गया है कि उसके स्वयंसेवक वेदारणयम और पुडुकोट्टई में चक्रवात राहत कार्यों में लगे हुए हैं। रविशंकर का राहत कार्यों का निरीक्षण करने का कार्यक्रम है जबकि स्थानीय लोग चाहते हैं कि वह आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करें।

बयान में कहा गया है, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग निहित स्वार्थों के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं।’ आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम को मंदिर के समीप एक सभागार में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम शुक्रवार शाम से शुरू होगा और शनिवार को खत्म होगा।

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