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मध्‍य प्रदेश उप-चुनाव में बसपा ने किया कांग्रेस का समर्थन, बीजेपी से यूपी में चुनावी हार का बदला लेने के लिए उठाया कदम

अटेर उप-चुनाव वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया और मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए नाक का सवाल बन गया है।

उत्‍तर प्रदेश चुनाव में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली थी।

उत्‍तर प्रदेश चुनाव में कड़ी हार का बदला भारतीय जनता पार्टी से लेने के लिए, बहुजन समाज पार्टी ने मध्‍य प्रदेश उप-चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया है। रविवार को होने वाले महत्‍वपूर्ण चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं ने इसका ऐलान किया। कांग्रेस महासचिव मोहन प्रकाश ने रिपोर्टर्स को बताया कि अटेर उप-चुनाव से पहले बसपा ने कांग्रेस को समर्थन दिया है। इसकी पुष्टि करते हुए बसपा के जिला प्रभारी गंभीर सिंह ने कहा कि ‘हमने उत्‍तर प्रदेश चुनावों का बदला लेने के लिए अटेर उप-चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया है।’ उत्‍तर प्रदेश से सटे भिंड जिले में बसपा को अच्‍छा जनसमर्थन हासिल है। अटेर उप-चुनाव वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया और मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए नाक का सवाल बन गया है। कांग्रेस यह सीट बचाए रखना चाहती है क्‍योंकि यह पूर्व नेता विपक्ष सत्‍यदेव कटारे की सीट है, जिनके निधन की वजह से उप-चुनाव हो रहा है। जबकि बीजेपी यह सीट कांग्रेस से छीनकर अपना विजय-रथ जारी रखना चाहती है।

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में भाजपा को बड़ी और अप्रत्याशित जीत मिली। खुद भाजपा को भी यकीन नहीं था कि उसके गठबंधन को 325 सीटें मिलेंगी। इस जीत को जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ईवीएम में छेड़छाड़ से हासिल की गई जीत बताया था।

चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में जाने को ईवीएम की गड़बड़ी करार दे चुकीं मायावती ने कहा था, ‘ब्राह्मण समाज नाराज न हो तो (भाजपा ने) ये बोल दिया कि मौर्य को आगे कर पिछड़ों के वोट ले लेंगे और फिर ब्राह्मण को मुख्यमंत्री बना देंगे … भाजपा ने दोनों को गुमराह किया।’ उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के पास ज्यादा कुछ नहीं होता।

मायावती ने ईवीएम का मुद्दा राज्‍य सभा में भी उठाया था। उन्‍होंने कहा था, ”हमारे संविधान में लोकतंत्र की व्यवस्था है जिसके तहत संसद और विधानसभाओं में वह लोग पहुंचते हैं जिन्हें जनता चुनती है, न कि ऐसे लोग संसद और विधानसभाओं में पहुंचते हैं जिन्हें ईवीएम चुनती है। बसपा प्रमुख ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब भाजपा नेताओं ने ईवीएम के उपयोग पर आशंका जाहिर करते हुए कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। लेकिन आज भाजपा सत्ता में आ गई है तो उसके सुर बदल गए हैं और वह ईवीएम को सही ठहराती है।”

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