three more farmer commit suicide in mp - Jansatta
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मध्य प्रदेश: तीन और किसानों ने की खुदकुशी, मंडियां अनिश्चितकाल के लिए बंद

मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे में तीन और किसानों ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद से पिछले एक सप्ताह में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या पांच हो गई है।

Author भोपाल | June 14, 2017 1:06 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के रूप में किया गया है। (Express Photo)

मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे में तीन और किसानों ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद से पिछले एक सप्ताह में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या पांच हो गई है। वहीं राज्य सरकार की घोषणा के खिलाफ व्यापारियों ने प्रदेश की अनाज और दलहन-तिलहन मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है।  मंदसौर जिले में छह मई को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में पांच किसानों के मारे जाने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से किसानों के हित में कई घोषणाएं करने के बाद भी इन पांच किसानों ने खुदकुशी की।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के रेहटी पुलिस थाना क्षेत्र के जानना गांव का किसान 55 साल के दुलचंद कीर ने सोमवार को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। रेहटी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक पंकज गीते ने कहा, ‘दुलचंद पर छह लाख रुपए का कर्ज था। लेकिन उसने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच की जा रही है।’ दुलचंद के बेटे शेर सिंह ने कहा कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर अकेले थे। उसने जब पिता को अचेत देखा तो वह उन्हें तुरंत रेहटी के अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।’ शेरसिंह ने भी यह कहा कि उनके पिता पर चार लाख रुपए बैंक और दो लाख रुपए अन्य स्रोतों का कर्ज था। इससे परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

वहीं जिला कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कहा कि खुदकुशी का कारण फिलहाल साफ नहीं है। मामले में जांच की जा रही है।होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के शिवपुर पुलिस थानाक्षेत्र के भैरोपुर गांव के किसान कृपाराम ने मंगलवार सुबह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी। उनके परिजनों ने बताया कि वह अपने कर्ज की अदायगी को लेकर व्यथित थे। उन्होंने इसको लेकर अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया था। शिवपुर के थाना प्रभारी मोनिष बैस ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि मृतक किसान अवसाद से ग्रस्त था। लेकिन फिलहाल आत्महत्या का कारण सामने नहीं आ सका है। मामले की जांच के बाद ही सही कारण का पता चलेगा। विदिशा जिले के शमशाबाद पुलिस थानाक्षेत्र के गांव जीरापुर के एक अन्य परेशानहाल किसान हरीसिंह जाटव ने सोमवार शाम को कीटनाशक गोलियां खा ली थीं। गंभीर हालत में जाटव को पहले विदिशा के अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें भोपाल में भर्ती किया गया, जहां रात में उनकी मौत हो गई।  शमशाबाद के तहसीलदार इसरार खान ने बताया कि भूमि सीमांकन को लेकर जाटव का अपने परिवार के सदस्यों से विवाद चल रहा था।

आठ जून को रायसेन जिले के सागोनिया गांव के किसान 45 साल के किशनलाल मीणा ने कर्ज से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के मुताबिक किशनलाल ने मृत्यु पूर्व अपने परिजनों को बताया कि उस पर एक निजी बैंक का 10 लाख रुपए समेत कुल 17 लाख रुपए का कर्ज था। वह अपनी तीन बेटियों के विवाह को लेकर भी चिंतित था। आठ जून को ही सीहोर जिले के जोगड़खेड़ी गांव के बीएएमएस (आयुर्वेद डाक्टर) डिग्रीधारी किसान 42 साल के बिशन सिंह राजपूत ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उनके छोटे भाई प्रवीण राजपूत ने कहा कि भोपाल से बीएएमएस की डिग्री लेने के बाद उसका बड़ा भाई यहां खेती करने लगा लेकिन पिछले तीन-चार साल में उसे इसमें भारी घाटा हुआ। प्रवीण ने बताया कि करीब 10 लाख रुपए के घाटे के कारण बड़े भाई ने यह आत्मघाती कदम उठाया।पिछले एक पखवाड़े में मध्य प्रदेश में तेज किसान आंदोलन देखा गया था। छह जून को मंदसौर जिले में पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई थी। प्रदेश में शांति बहाली के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान में 11 जून से 28 घंटों तक उपवास पर बैठे थे। उपवास तोड़ते हुए उन्होंने घोषणा की थी कि फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर खरीद अब राज्य में अपराध होगा। सरकार के इस फैसले से नाराज व्यापारियों ने प्रदेश की अनाज और दलहन-तिलहन मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की अपील की है। सकल अनाज दलहन-तिलहन व्यापारी महासंघ समिति के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने मंगलवार को इस प्रदेशस्तरीय संगठन की साधारण सभा की बैठक के बाद बताया, ‘एमएसपी पर उपज खरीदने को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने की घोषणा के बाद हमारे लिए प्रदेश में व्यापार करना मुश्किल हो गया है। लिहाजा हमने तय किया है कि जब तक यह घोषणा वापस नहीं ली जाती, तब तक हम मंडियां बंद रखेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि राज्य की 85 फीसद मंडियों में कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह बंद हैं।

आत्महत्या के दो मामले मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर के हैं

सरकार की घोषणा से नाराज व्यापारियों ने किया मंडी बंद रखने का फैसला
फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर खरीद अब राज्य में अपराध होगा। सरकार के इस घोषणा से नाराज व्यापारियों ने प्रदेश की अनाज और दलहन-तिलहन मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की अपील की है। सकल अनाज दलहन-तिलहन व्यापारी महासंघ समिति के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने मंगलवार को इस प्रदेशस्तरीय संगठन की साधारण सभा की बैठक के बाद बताया, ‘एमएसपी पर उपज खरीदने को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने की घोषणा के बाद हमारे लिए प्रदेश में व्यापार करना मुश्किल हो गया है। लिहाजा हमने तय किया है कि जब तक यह घोषणा वापस नहीं ली जाती, तब तक हम मंडियां बंद रखेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि राज्य की 85 फीसद मंडियों में कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह बंद हैं।

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