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चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट से शिवराज सिंह चौहान को झटका, कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज मानहानि का केस खारिज

कांग्रेस नेता मिश्रा ने व्यापमं घोटाले में सीएम शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधाना सिंह की संलिप्तता के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सीएम के ससुराल गोंदिया से 19 परिवहन निरीक्षकों की भर्ती हुई है।
कांग्रेस नेता के के मिश्रा (बाएं) और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (दाएं)।

विधान सभा चुनावों से पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। चौहान द्वारा कांग्रेस नेता और प्रदेश प्रवक्ता के के मिश्रा के खिलाफ दर्ज मानहानि का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे पहले इस मामले में राज्य की निचली अदालत ने के के मिश्रा को पिछले साल दो साल की सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2014 का है, जब एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर 21 जून, 2014 को के के मिश्रा ने आरोप लगाया था कि व्यापमं घोटाले में सीएम शिवराज सिंह चौहान और उनके परिजनों की संलिप्तता है। इसके बाद 24 जून, 2014 को मुख्यमंत्री की तरफ से भोपाल की अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था।

बता दें कि कांग्रेस नेता मिश्रा ने व्यापमं घोटाले में सीएम शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधाना सिंह की संलिप्तता के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सीएम के ससुराल गोंदिया से 19 परिवहन निरीक्षकों की भर्ती हुई है। उन्होंने इस बारे में आरोप लगाया था कि इस भर्ती में मुख्यमंत्री निवास से किसी प्रभावशाली महिला (सीएम की पत्नी साधना सिंह) ने व्यापमं के आरोपी नितिन महिन्द्रा समेत अन्य को 129 फोन कॉल किए थे। के के मिश्रा के आरोपों के खिलाफ मामले में 24 नवंबर 14 को सरकार की अनुमति से लोक अभियोजक ने मुख्यमंत्री की मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

इसके बाद करीब साढ़े तीन साल तक सुनवाई करने और सीएम समेत दोनों पक्षों का बयान दर्ज करने के बाद भोपाल के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पिछले साल 17 नवंबर को केके मिश्रा को मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी और 25 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, सजा सुनाए जाने के 10 मिनट बाद ही उन्हें जमानत मिल गई थी। के के मिश्रा बाद में इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे।

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