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कागजों पर अनुसूचित जनजाति छात्रावास में 50 बच्चे दिखाकर ले रहे थे पैसे, अफसर ने जांच की तो मिले 11 बच्चे

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बक्सवाहा तहसील की जहां पर अनुसूचित जनजाति छात्रावास के छोटे बच्चों से खाना बनवाया जा रहा था।

Author छत्तरपुर | Updated: February 4, 2017 1:42 PM
छात्रावास में खुद खाना बनाते बच्चे।

मध्य प्रदेश के अनुसूचित जनजाति छात्रावास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके है। कागजों में तो बच्चों की संख्या कुछ और दिखाई जाती है लेकिन जब अधिकारी मौके पर जाकर निरीक्षण करते है तो असलियत कुछ और निकलती है। ऐसा ही वाकया सामने आया है छत्तरपुर जिले के अनुसूचित जनजाति छात्रावास का जहां पर कागजों में तो कुछ और दिखाया गया लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही थी। इस छात्रावास में कागजों में बच्चों की संख्या 50 दिखाई गई लेकिन निरीक्षण करने पर पाया कि वहां केवल 11 बच्चे ही मौजूद थे। इतना ही नहीं सरकार द्वारा छात्रावास के अधिकारियों, चौकीदार, रसोईए से लेकर हर प्रकार का खर्च दिए जाने के बाद भी वहां पर बच्चों से खाना बनावाया जाता है। इस छात्रावास की कई बार शिकायतें की गई जिसके बाद बक्सवाहा की तहसीलदार ने इस छात्रावास का निरीक्षण किया तो उन्होंने पाया कि यहां पर छोटे-छोटे बच्चों से खाना बनवाया जाता है। छात्रावास के लिए सरकार द्वारा काफी पैसे दिए जाते है लेकिन छात्रावास की देखरेख करने वाले लोग उसे खा जाते है।

बक्सवाहा की तहसीलदार विनीता जैन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बक्सवाहा के इस अनुसूचित जनजाति छात्रावास की शिकायत काफी समय से उन्हें मिल रही थी। बार-बार शिकायते आने के बाद विनीता जैन छात्रावास के निरीक्षण के लिए अचानक वहां पहुंच गई। विनीता जैन को अचानक छात्रावास में देखकर वहां के अधिकारी सहम गए। निरीक्षण करने के बाद विनीता जैन ने पाया कि वहां पर छोटे-छोटे बच्चों से खाना बनवाया जा रहा था। जिन बच्चों को पढ़ने के लिए छात्रावास में रखा गया है वे बच्चे मिलजुलकर अपने लिए खुद खाना बना रहे थे। विनीता जैन ने जब छात्रावास के अधीक्षक के बारे में पूछा तो वह वहां पर मौजूद ही नहीं थे। बच्चों की संख्या के बारे में बात करते हुए विनीता जैन ने बताया कि कागजों में इस छात्रावास में बच्चों की संख्या 50 दी गई लेकिन  50 में से केवल 11 बच्चे ही तहसीलदार को वहां पर उपस्थित मिले।

हर साल इस छात्रावास के खर्चे के लिए काफी पैसा सरकार इन्हें देती है लेकिन बच्चों से खाना बनवाना यह साबित करता है कि यह छात्रावास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। इससे राज्य के बाकी के छात्रावासों के हालातों पर भी सरकार को गौर फरमाना होगा क्योंकि हो सकता है कि ऐसा ही हाल अन्य छात्रावासों का भी हो। जिस प्रकार इस छात्रावास का अचानक से निरिक्षण किया गया उसी प्रकार सरकार द्वारा अन्य छात्रावासों का भी निरिक्षण होना चाहिए जिससे कि पता चल सके कि सरकारी पैसा जा कहां रहा है।

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