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अखिलेश यादव बोले- 2019 में यूपी देगा नया प्रधानमंत्री!

अखिलेश ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान किसान हितैषी होने का दावा करते हैं लेकिन उनकी सरकार में किसान हाशिए पर हैं और खुदकुशी करने को मजबूर हैं।

अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उनका राज्य यानी उत्तर प्रदेश देश को एक नया प्रधानमंत्री देगा। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या बसपा सुप्रीमो मायावती का समर्थन करेगी तो उन्होंने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। गुरुवार (19 जुलाई) को भोपाल में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “लोकसभा चुनाव के बाद आप एक नया प्रधानमंत्री देखेंगे।” इस दौरान अखिलेश केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि अब देश परिवर्तन चाह रहा है। लोग मोदी सरकार की नीतियों और फैसलों से नाराज हैं। एचटी के मुताबिक अखिलेश ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए नोटबंदी, जीएसटी से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार देने के मुद्दे पर युवाओं को ठगा है।

अखिलेश ने कहा कि जब 47 राजनीतिक दलों के गठबंधन के बल पर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो महागठबंधन क्यों नहीं दिल्ली में सरकार बना सकता है। उन्होंने कहा कि सपा ने इसकी शुरुआत कर दी है और उन्हें भरोसा है कि ऐसा होने जा रहा है। मध्य प्रदेश के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन करने के मुद्दे पर सपा अध्यक्ष ने कहा कि इस पर बातचीत जारी है। हालांकि, उन्होंने उसका विवरण देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान है। अखिलेश ने अटेर और चित्रकूट में हुए हालिया उप चुनाव और उसमें कांग्रेस की जीत का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बीजेपी के शासन से ऊब चुकी है। अखिलेश ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान किसान हितैषी होने का दावा करते हैं लेकिन उनकी सरकार में किसान हाशिए पर हैं और खुदकुशी करने को मजबूर हैं।

अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी ने 51 पर्यवेक्षकों से राज्य की सभी 230 विधान सभा सीटों पर सर्वे कराया है और उन क्षेत्रों की पहचान की है जहां सपा की मजबूत पकड़ है। देर शाम अखिलेश ने पूर्व राज्यपाल और कांग्रेस नेता अजीज कुरैशी के घर पर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से करीब 90 मिनट तक बातचीत की। पटेल ने बताया कि उनकी बैठक बीजेपी के खिलाफ प्रचार करने पर केंद्रित थी। हार्दिक पटेल ने एमपी विधान सभा चुनावों में टिकट मांगने से इनकार किया और कहा कि अगर उन्हें चुनाव लड़ना होता तो गुजरात से ही लड़ते, एमपी क्यों आते?

 

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