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60 दिन पहले हुआ था शहीद, शिवराज सरकार ने परिजनों से कहा- शहादत का सर्टिफिकेट लाओ तब देंगे मदद

जवान रंंजीत सिंह तोमर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। लेकिन अब सरकार के अफसर शहीद के परिवार से शहादत का सर्टिफिकेट मांग रहे हैं।

शहीद रंजीत सिंह और मघ्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। फोटो- फेसबुक/एक्‍सप्रेस आर्काइव

भारतीय सेना के जवान रंजीत सिंह तोमर दो महीने पहले जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में शहीद हो गए थे। जवान रंंजीत सिंह तोमर मध्य प्रदेश के दतिया जिले के रहने वाले थे। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। लेकिन अब सरकार के अफसर शहीद के परिवार से शहादत का सर्टिफिकेट मांग रहे हैं। शहीद के परिजन अब एक सरकारी विभाग से दूसरे के चक्कर काट रहे हैं।

बता दें कि शहीद रंजीत सिंह तोमर की मौत दो महीने पहले 6 जुलाई को कुपवाड़ा में हुई थी। वह 28 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान थे। जब शहीद का शव अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव रेव में लाया गया था । इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि देगी। इसके साथ ही छोटी बहन को फ्लैट, भाई को सरकारी नौकरी और दतिया जिले में किसी सरकारी संस्था का नाम शहीद रंजीत सिंह के नाम पर करने का ऐलान किया था।

लेकिन मुख्यमंत्री के द्वारा की गई घोषणाओं पर अमल अभी तक नहीं हो सका है। राज्य सरकार के गृह विभाग के अधिकारी शहीद के परिवार से बैटल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट की मांग कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शहीद के बड़े भाई हीरा सिंह तोमर जब इस संबंध में मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिले तो उन्होंने कहा कि शहीद का प्रमाणपत्र लेकर आएं। जब तक प्रमाणपत्र नहीं होगा, फंड रिलीज नहीं किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, मप्र शासन के उपसचिव बीएस जामोद ने कहा कि शहीद रंजीत सिंह तोमर के मामले में सेना मुख्यालय से बैटल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट अब तक नहीं आया है। जब तक यह सर्टिफिकेट नहीं आएगा, तब तक मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक शहीदों को दिया जाने वाला कोई लाभ शासन की ओर से नहीं दिया जा सकता है। यह एकमात्र केस है, जिसमें देरी हुई है। इस तरह का और कोई मामला शासन के पास लंबित नहीं है।

राज्य सरकार ने शहीद के परिवार को भले ही घोषणा के मुताबिक मदद की राशि जारी न की हो, लेकिन सेना ने अपने हिस्से की मदद जारी कर दी है। सेना ने शहीद की मां द्रौपदी सिंह तोमर को शहीद का 11 सालों का पूरा वेतन, इसके बाद पारिवारिक पेंशन मंजूर कर दी है। इसके अलावा लगभग 65 लाख रुपये की आर्थिक मदद और क्लेम की रकम भी सेना ने दे दी है। सेना ने शहीद के भाई को भर्ती होने का आॅफर भी दिया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के कैप्टन एकेएस पलवर ने कहा कि शहीद के परिजनों को राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली मदद का मामला जिला सैनिक कल्याण बोर्ड से प्रोसेस होता है। लेकिन सेना मुख्यालय से दस्तावेज हमारे पास नहीं आए हैं। जवान लड़ाई में नहीं शहीद हुआ है। कोर्ट आॅफ एनक्वायरी के बाद ही मामले के दस्तावेज बोर्ड के पास आएंगे। दैनिक भास्कर ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से लिखा है कि रंजीत की मौत गन शॉट के कारण हुई है। मामले की कोर्ट आॅफ एनक्वायरी चल रही है। इस पूरी प्रक्रिया में 3-4 महीने का वक्त लगता है। रिपोर्ट आने के बाद बोर्ड ऑफ ऑफिसर इस मसले पर निर्णय लेगा।

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