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भोपाल में मिला कोरोना का नया वेरिएंट, उधर, महाराष्ट्र में 2-4 हफ्तों में तीसरी लहर के आसार

भोपाल के बरखेड़ा पठानी में रहने वाली एक महिला में नए वेरिएंट डेल्टा प्लस का पता लगा है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि टेस्ट करवाने के बाद उसके सैम्पल्स को हायर रिसर्च इंस्टीट्यूट में भेज कर जांच कराई जा रही है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)।

देश में कोरोना के केसों में जहां कमी दर्ज की जा रही है और स्थितियां काबू में होने की तरफ हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोविड के खतरनाक वेरिएंट डेल्टा प्लस के लक्षण मिले हैं। इससे राज्य में हड़कंप की स्थिति है। सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों से इस मामले की जांच करवा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि भोपाल के बरखेड़ा पठानी में रहने वाली एक महिला में नए वेरिएंट डेल्टा प्लस का पता लगा है। एनएसडीसी ने इस बात की सूचना दी है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि टेस्ट करवाने के बाद उसके सैम्पल्स को एनएसडीसी और हायर रिसर्च इंस्टीट्यूट में भेज कर उसके जेनेटिक और वेरिएंट के बारे में जांच कराई जा रही है। खास बात यह है कि महिला पहले ही वैक्सीन की दोनों खुराकें ले चुकी है। महिला के संपर्क में आने वाले लोगों के बारे में भी पता किया जा रहा है।

उधर, महाराष्ट्र में कोविड -19 टास्क फोर्स ने चेतावनी दी है कि अगर पिछले तीन दिनों में जिस तरह की भीड़भाड़ की स्थिति देखी जा रही है तो यह साफ संकेत है तो अगले दो से चार सप्ताह में राज्य में खास तौर पर मुंबई में तीसरी लहर आ सकती है। नागरिकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। हालांकि बताया जा रहा है कि इससे बच्चे उतना नहीं प्रभावित होंगे, जितना कि निम्न मध्यम वर्ग के वे लोग होंगे जो अब तक वायरस के संपर्क में नहीं आए हैं।

बुधवार को सीएम उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में अनुमानित तीसरी लहर की तैयारियों की समीक्षा के लिए हुई टास्क फोर्स की बैठक में इसकी आशंका जताई गई। इसमें टास्क फोर्स के सदस्य, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह शामिल थे।

बैठक में पेश आंकड़ों के मुताबिक, तीसरी लहर में मामलों की कुल संख्या दूसरी लहर के मामलों की तुलना में दोगुनी होने का अनुमान है। सक्रिय मामले 8 लाख तक पहुंच गए हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि पहली लहर में 19 लाख मामले सामने आए, जो दूसरी लहर में बढ़कर 40 लाख हो गए। हालांकि, यह उम्मीद की जा रही है कि कुल मामलों का 10% बच्चों या युवा वयस्कों से आएगा, जैसा कि पहली दो लहरों में हुआ है।

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