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मध्य प्रदेश: प्राचीन मूर्तियों को चुराकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 3 मूर्तियां बरामद

उन्होंने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी रीयल एस्टेट क्षेत्र के कारोबारियों के वॉट्सऐप समूहों पर तीन मूर्तियों की फोटो पोस्ट करके इन्हें ऊंचे दामों पर बेचने का प्रयास कर रहे हैं।

Author September 21, 2017 7:26 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों की खरीद-फरोख्त के गिरोह का भंड़ाफोड़ करते हुए पुलिस ने गुरुवार को यहां 10 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 100 से 400 वर्ष पुरानी तीन मूर्तियां बरामद की गयी हैं। अष्टधातु की इन मूर्तियों की कुल कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरिनारायणचारी मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया कि आरोपियों की पहचान टीकमचंद कसेरा, कलीमुद्दीन बोहरा, नाथूलाल प्रजापत, आलादेव साहू, राजकुमार घिंडवानी, राजेंद्र सोनी, अकबर खान, वसीम अख्तर, मोहम्मद ऐजाज और मुर्तजा बोहरा के रूप में हुई है।

उन्होंने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी रीयल एस्टेट क्षेत्र के कारोबारियों के वॉट्सऐप समूहों पर तीन मूर्तियों की फोटो पोस्ट करके इन्हें ऊंचे दामों पर बेचने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ पुलिसकर्मियों को मूर्तियों के खरीदार के रूप में पेश कर जाल बिछाया गया और आरोपियों को धर दबोचा गया। मिश्रा ने बताया कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से बरामद नागकन्या और भगवान गणेश की मूर्ति 400-400 साल पुरानी है, जबकि गणेश की एक अन्य मूर्ति 100 साल पुरानी है।

उन्होंने बताया कि मध्यकालीन इतिहास की रोशनी में पुलिस को मिले सुरागों के मुताबिक इन मूर्तियों का मूल संबंध राजस्थान या मध्य प्रदेश के मंदसौर-नीमच क्षेत्र या मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में फैले बुंदेलखंड अंचल से हो सकता है। इस बात की छानबीन की जा रही है कि ये मूर्तियां आरोपियों तक कैसे पहुंचीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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