प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'नमो' झाड़ू देना चाहता है शख्‍स, हर एक की 850 रुपये लगाई कीमत - Man from Rajasthan’s Kota wants to gift giant ‘NaMo brooms’ to PM Narendra Modi - Jansatta
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नमो’ झाड़ू देना चाहता है शख्‍स, हर एक की 850 रुपये लगाई कीमत

जैन का दावा है कि यह दुनिया की सबसे लंबी झाड़ू हैं। यह दावा उन्होंने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के सामने किया है।

जैन ने अपनी रिक्वेस्ट का स्टेटस जानने के लिए आरटीआई दायर की है। (सांकेतिक फोटो)

राजस्थान के कोटा में झाड़ू बनाने वाला एक शख्स 2 साल से पीएम मोदी से मुलाकात के लिए वक्त मिलने का इंतजार कर रहा है। वह अपनी झाड़ू का एक जोड़ा उनके सामने पेश करना चाहता है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मोदी सरकार के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर 35 साल के राहुल जैन ने दो झाड़ू तैयार की हैं। यह झाड़ू 8 फीट 6 इंच लंबी और 3 इंच मोटी हैं। वह इन झाड़ूओं को पीएम मोदी को गिफ्ट करना चाहता है। राहुल जैन ने इन झाड़ूओं का नाम नमो झाड़ू रखा है, वहीं एक झाड़ू की कीमत 850 रुपये है। मोदी का स्लोगन, स्वच्छ भारत अभियान और सबका साथ सबका विकास झाड़ू में लगे डंडे पर लिखे हुए हैं। जैन का दावा है कि यह दुनिया की सबसे लंबी झाड़ू हैं। यह दावा उन्होंने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के सामने किया है।

जैन ने बताया कि उसने 2015 में प्रधानमंत्री कार्यालय में अपॉइंटमेंट के लिए फोन किया था।  वह इन झाड़ूओं को पीएम गिफ्ट करना चाहता है। तो पीएमओ से जवाब मिला कि पीएमओ के अपॉइंटमेंट सेक्शन में एक ईमेल कर दीजिए। उसके बाद ईमेल किया, अभी तक ईमेल पर कोई रिप्लाई नहीं आया है।

जैन ने बताया कि उसने अप्रैल 2015 से अगस्त 2015 के बीच 4 मेल किए, कई बार फोन भी किया, लेकिन अपॉइंटमेंट को लेकर अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। मैंने स्वच्छता अभियान के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए ‘नमो झाड़ू’ तैयार कीं। अब मैं पीएमओ से अपॉइंटमेंट को लेकर मिलने वाली खराब प्रतिक्रिया से निराश हूं।

अगर प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात संभव नहीं है, तो पीएमओ को कम से कम झाड़ू भेजने के लिए मुझसे पूछना चाहिए। जैन ने अपनी रिक्वेस्ट का स्टेटस जानने के लिए आरटीआई दायर की है। पोलाची (तमिलनाडु) से लाए गए नारियल पत्ते और असम के बांस से ‘नामो झाडू’ बनाई गई है। जैन ने बताया कि इन झाड़ुओं को बनाने में 8 लोग लगे हैं। यह वर्क्स मध्य प्रदेश के झाबुआ इलाके से हैं और दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के हैं।

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