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मध्य प्रदेश: सदन में बाबूलाल गौर ने पूछा- कुपोषण से कितनी मौतें हुईं, मंत्री ने कहा- एक भी नहीं तो बिफर पड़े पूर्व सीएम

गौर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुपोषण से 116 मौतें हो चुकी हैं जबकि महिला और बाल विकास विभाग इससे इनकार कर रहा है।

प्रति घंटा तीन से ज्यादा बच्चे कुपोषण के चलते होने वाली बीमारियों से मरते हैं। (Express File Photo)

मध्य प्रदेश में कुपोषण के बढ़ते मामलों पर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल गौर ने शिवराज सरकार पर विधान सभा में ही निशाना साधा है। गौर ने शिवराज सिंह सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने शुक्रवार को सदन में प्रश्नकाल के दौरान कुपोषण का मामला उठाया और पूछा कि श्योपुर जिले में वर्ष 2015 और 2016 में कुपोषण से किस-किस माह में कितनी मौतें हुई हैं? क्या कुपोषित बच्चे और गर्भवती महिलाओं का सर्वे करवाया गया? कुपोषितों की अलग-अलग संख्या बताई जाय। गौर के इस सवाल पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने जवाब दिया लेकिन बाबूलाल गौर मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुपोषण से हुई मौत के आंकड़े गलत पेश किये गए हैं।

गौर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुपोषण से 116 मौतें हो चुकी हैं जबकि महिला और बाल विकास विभाग इससे इनकार कर रहा है। बाबूलाल गौर ने कहा कि मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए। इस पर मंत्री अर्चना चिटनिस ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार मामले की दोबारा जांच कराएगी। इसके बाद गौर ने कहा कि जांच के लिए श्योपुर मुझे भी साथ लेकर चलें। गौर ने इसके बाद भी मंत्री से सवाल पूछा कि क्या सरकार एक माह में इस मामले की जांच कराएगी?

Babulal Gaur, Babulal Gaur MP, Babulal Gaur Minister, Babulal Gaur Criminal case, Babulal Gaur Caste, Babulal Gaur MP Minister, Shivraj Singh Chouhan, Madhya Pradesh News, Bhopal News, India मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल गौर। (Express Archive)

दरअसल, श्योपुर जिले में कुपोषण से हाल बेहाल है। सितंबर और अक्टूबर 2016 में कुपोषण से 116 बच्चों की मौत के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। अक्टूबर अंत तक यहां 22,708 बच्चे कुपोषित थे जो बढ़कर अब 31 दिसंबर 2016 तक 24,448 हो गई है। यानी तीन महीने में 1740 नए कुपोषित बच्चे सामने आए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने श्योपुर में 1 नवंबर 2016 से 20 जनवरी 2017 तक बच्चों का वजन लेने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष अभियान भी चलाया था। बावजूद इसके वहां हालात जस के तस बने हुए हैं। इसी वजह से बाबूलाल गौर ने विधान सभा में कुपोषण से हुई मौतों और मौजूदा स्थिति की जांच कराने मांग की है।

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