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IPL 2018: VIP ट्रीटमेंट नहीं मिला तो मंत्री ने बंद करवाया इंदौर स्‍टेडियम का गेट, भड़कीं प्रीति जिंटा

IPL 2018: के मैचों के लिए किंग्स इलेवन पंजाब ने इंदौर के होलकर स्टेडियम को अपना होम ग्राउंड बनाया था। लेकिन राज्य सरकार के एक मंत्री को वीआईपी टिकट न देना फ्रेंचाइजी को महंगा पड़ रहा है। अब फ्रेंचाइजी से नाराज लोगों ने अपने ढंग से एक्‍शन शुरू कर दिया है।

आईपीएल-2018 के एक मैच को देखती हुईं किंग्स इलेवन पंजाब की मा​लकिन अभिनेत्री प्रीति जिंटा। फाइल फोटो- पीटीआई

आईपीएल-2018 के मैचों के लिए किंग्स इलेवन पंजाब ने इंदौर के होलकर स्टेडियम को अपना होम ग्राउंड बनाया था। लेकिन राज्य सरकार के एक मंत्री को वीआईपी टिकट न देना फ्रेंचाइजी को महंगा पड़ रहा है। मंत्री ने स्टेडियम की तरफ गुजरने वाले रास्ते को न सिर्फ बंद करवा दिया है बल्कि अपने विभाग की जमीन पर बनाई गई पार्किंग को भी हटवा दिया है। इस व्यवहार से फ्रेंचाइजी किंग्स इलेवन पंजाब की मालकिन प्रीति जिंटा का गुस्सा भड़क उठा है। उन्होंने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश सरकार के अफसरों और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

गैलरी के पास देखकर भड़के मंत्री: दरअसल सोमवार (14 मई) की रात आईपीएल-2018 में किंग्स इलेवन पंजाब का मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से होने वाला था। मैच देखने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर नेता और शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह परिवार सहित भोपाल से इंदौर आए थे। लेकिन फ्रेंचाइजी ने उन्हें बैठने के लिए गैलरी के पास दिए थे। ये हालात देखकर मंत्री विजय शाह भड़क उठे।

अगले दिन हुआ एक्शन: मंगलवार (15 मई) को उन्होंने स्टेडियम से सटे हुए दो गेटों पर ताला डलवा दिया। ये दोनों ही गेट सरकारी विवेकानंद स्कूल से होकर गुजरते हैं। इसके अलावा उन्होंने सुलभ शौचालय के पास वाले गेट पर भी ताला लगवा दिया। ये तीनों रास्ते उसी स्कूली शिक्षा विभाग की जमीन से होकर गुजरते हैं, जिसके मंत्री कुंवर विजय शाह हैं। मैच देखने के लिए दर्शक विवेकानंद स्कूल के मैदान से होकर ही संध्या अग्रवाल गेट से स्टेडियम में जा पाते हैं। जबकि उसके पास वाला गेट एमपीसीए के पदाधिकारियों के लिए होता है।

दौरा करके डलवा दिया ताला : मंगलवार को मंत्री कुंवर विजय शाह ने स्कूल का दौरा किया और दोनों गेटों को तुरंत ही बंद करवा दिया। उन्होंने ये भी निर्देश दिया कि स्कूल के मैदान में पार्किंग भी न होने दी जाए। शिक्षा विभाग के अफसरों को उन्होंने ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने के आदेश दिए। मौके पर मौजूद जिला शिक्षा निरीक्षक सीके शर्मा और जेडी एके शर्मा ने तत्काल दोनों गेटों पर ताला लगा दिया।

अच्छा नहीं रहा अनुभव: इस पूरे मामले पर फ्रेंचाइजी के सीईओ सतीश मेनन ने मीडिया से बातचीत में बयान दिया कि इस बार का अनुभव बेहद बुरा रहा है। हर मैच में अफसरों को 60 से 70 लाख रुपये के टिकट चाहिए होते हैं। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग किया है। इंदौर के दर्शक अच्छे हैं लेकिन किसी को बुलाने के लिए हालात और​ सिस्टम में सुधार करना बहुत जरूरी होता है।

सब हैं एक-दूसरे से नाराज: इस मैच में दर्शक, प्रशासन, फ्रेंचाइजी और नेता, सभी एक दूसरे से नाराज हैं। दरअसल मोहाली में किंग्स इलेवन पंजाब ने प्रति दर्शक टिकट न्यूनतम 500 रुपये रखा था, लेकिन इंदौर में इसे 900 रुपये कर दिया गया। प्रशासन इसलिए नाराज है क्योंकि फ्रेंचाइजी मालकिन प्रीति जिंटा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने पूरे मैच में सहयोग नहीं किया। नाराज होकर अफसरों ने अपने कॉम्पिलिमेंट्री टिकट लौटा दिए। पुलिस के अफसरों को शिकायत रही कि फ्रेंचाइजी ने उन्हें मांग के मुताबिक टिकट नहीं दिए। महापौर को ग्रीन कॉन्सेप्ट में सम्मान नहीं मिला, उन्हें 200 गैलरी टिकट दिए गए थे। महापौर ने सभी टिकट लौटा दिए और मनोरंजन कर का नोटिस फ्रेंचाइजी को भेज दिया।

क्या कहते हैं अफसर : इंदौर के कलेक्टर निशांत वरवड़े ने कहा,’फ्रेंचाइजी से हमने एक भी टिकट नहीं लिया है। कोई विवाद नहीं है। जबकि डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने कहा,’पुलिस विभाग ने डयूटी निभाई है। टिकट मांगने जैसी कोई बात नहीं है। फ्रेंचाइजी और मैच को प्रदेश में पूरी सुरक्षा प्रदान की गई है।’

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