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शिवराज सिंह के मंच पर पूर्व डकैत मलखान सिंह, कहा- करूंगा भाजपा का प्रचार

जब ​सीएम शिवराज सिंह की जन आशीर्वाद यात्रा गुना पहुंची तो मलखान सिंह भी शिवराज के मंच पर दूसरी पंक्ति में मौजूद दिखे थे। सनद रहे कि गुना संसदीय क्षेत्र कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया की पारंपरिक सीट है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ मंच साझा करते पूर्व दस्यु सरगना मलखान सिंह। फोटो- पुष्‍पेंद्र वैद्य

स्‍वतंंत्र पत्रकार पुष्‍पेंद्र वैद्य के सौजन्य से। छह फीट लंबा कद, रौबदार चेहरा, गठीला बदन, गलों से उठकर कान को छूती हुई मूंछें, नाक से ऊपर से शुरू होकर माथे के ऊपर तक जाता विशाल तिलक और कंधे पर टंगी हुई अमेरिकन मेड सेल्फ लोडिंग रायफल। ये कुछ ऐसी जानकारियां थीं जो पुलिस के पास साल 1983 तक डाकू मलखान सिंह के बारे में हुआ करती थीं।

शिवराज के साथ साझा किया मंच: लेकिन मध्य प्रदेश सत्तारूढ़ भाजपा के पास मलखान सिंह के बारे में कुछ और नई जानकारियां भी हैं। शायद यही कारण है कि जब ​सीएम शिवराज सिंह की जन आशीर्वाद यात्रा गुना पहुंची तो मलखान सिंह भी शिवराज के मंच पर दूसरी पंक्ति में मौजूद दिखे थे। सनद रहे कि गुना संसदीय क्षेत्र कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया की पारंपरिक सीट है।

खंगार जाति के हैं मलखान: दरअसल पूर्व दस्यु सरगना मलखान सिंह खंगार जाति से ताल्लुक रखते हैं। बुंदेलखंड में पारंपरिक रूप से मार्शल जाति के तौर खंगारों को पहचाना जाता है। खंगार जाति के लोग पारंपरिक रूप से किले पर पहरा देने और अंगरक्षकों का काम किया करते थे। शिवपुरी के अलावा ग्वालियर चंबल संभाग की कई सीटों और बुंदेलखंड में भी खंगार जाति की बहुलता है।

ये है वोटों का गणित: शिवपुरी जिले की करेरा विधानसभा सीट में भी खंगार जाति के करीब 15-16 हजार वोटर हैं। इस सीट पर खंगार वोट हमेशा ही जीत—हार तय करने में अहम भूमिका निभाता है। ग्वालियर-चंबल के इलाके में करीब 34 विधानसभा सीट हैं। लगभग हर सीट पर 18-20 हजार वोटर खंगार जाति का है। मलखान सिंह की इस जाति के बीच में रॉबिनहुड की छवि है। भाजपा का गणित इसी छवि को कैश करवाने का है।

चुनौती है सिंधिया परिवार का दबदबा: राजस्थान में सिंधिया परिवार की बेटी और सीएम वसुंधरा राजे की चुनौती ​अक्सर भाजपा आलाकमान का सिरदर्द बन जाती है। लेकिन भाजपा आलाकमान ये गलती मध्य प्रदेश में नहीं दोहराना चाहता है। भाजपा सिंधिया घराने के गढ़ ग्वालियर चंबल संभाग में ही उनका दबदबा तोड़ना चाहती है। सिंधिया से मतलब कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही यशोधरा सिंधिया से भी है। बीजेपी इस बार यशोधरा का टिकट काटना चाहती है। ये आशंका खुद यशोधरा राजे ही जता चुकी हैं। शिवपुरी की करेरा सीट पर पिछली बार भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई थी। लेकिन इस बार भाजपा पिछली गलती दोहराने के मूड में नहीं है।

अब भाजपा के समर्थक हैं मलखान: दस्यु मलखान सिंह पर 32 पुलिसकर्मियों सहित 185 लोगों की हत्या का आरोप था। 1983 में मलखान सिंह ने तत्कालीन सीएम अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वहीं इस नए गठजोड़ पर मलखान सिंह का कहना है,”50 सालों तक कांग्रेस ने ऐसे हालात बनाए थे जिसकी वजह से कई लोग बी​हड़ों में बागी हो गए। शिवराज सिंह अच्छा काम कर रहे हैं। उनकी भाषा-शैली मुझे पसंद है। वे धर्म का काम कर रहे हैं। ग्वालियर-चंबल इलाके की 34 सीटों पर खंगार जाति के 15-18 हजार वोटर हैं। मैं इस चुनाव में उन्हें भाजपा के साथ जोड़ने के लिए काम करूंगा। मुझे टिकट की लालासा नहीं है। मैं तो टिकट पर खड़े होने वालों का प्रचार करूंगा। आरक्षण भी जाति के आधार पर नहीं, आर्थिक आधार पर होना चाहिए। मैं कभी डाकू नहीं रहा बल्कि बागी रहा हूं।”

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