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सरकारी व‍िमान द‍िल्‍ली से भोपाल भेज इस सीएम ने मंगवाया था अपना पायजामा

प्रकाश चंद्र सेठी ने 29 जनवरी 1972 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

Author Updated: January 19, 2018 11:20 PM
प्रकाश चंद्र सेठी की एक पुरानी तस्वीर। (Photo Source : Indian Express Archive)

मध्य प्रदेश की राजनीति में 60 और 70 के दशक काफी उठापटक वाले रहे। इन दो दशकों में बतौर सीएम राज्य की कमान कई लोगों के हाथ में रही। 60 के दशक की उठापटक के बीच मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ला के बेटे श्यामा चरण शुक्ला को भी मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन वह ज्यादा दिन सीएम पद पर नहीं रह पाए। 26 मार्च 1969 को सीएम पथ की शपथ लेने वाले शुक्ला ने 28 जनवरी 1972 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। श्यामा चरण शुक्ला के इस्तीफे के बाद प्रकाश चंद्र सेठी को कांग्रेस विधायकों ने अपना नेता चुना था। उज्जैन से विधायक रहे सेठी ने 29 जनवरी 1972 को सीएम पद की शपथ ली।

प्रकाश चंद्र सेठी के बारे में एक किस्सा प्रचलित है कि एक बार उन्होंने सरकारी विमान दिल्ली से भोपाल भेजकर अपना पायजामा मंगवाया था। मामला कुछ ऐसा था कि सेठी मौजूदा कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद की शादी में शामिल होने दिल्ली आए थे। इस दौरान उन्हें रात गुजारने के लिए दिल्ली में ही रुकना पड़ा। ऐसे में उन्होंने सरकारी विमान दिल्ली से भोपाल भेजकर अपना पायजमा मंगवाया था। वहीं उनके बारे में दूसरा किस्सा है कि उनके डर से चंबल के डाकूओं ने सरेंडर कर दिया था, ये वही डाकू थे जिनसे मध्य प्रदेश के लोग कांपते थे। हुआ कुछ ऐसा था कि उन दिनों मध्य प्रदेश में डाकूओं की समस्या काफी बड़ी थी। उस वक्त जय प्रकाश नारायण और विनोबा भावे डकैतों को सेरेंडर के लिए समझा रहे थे। वहीं सेठी डकैतों से सख्ती से निपटना चाहते थे। डाकूओं के इलाकों में बम गिराने के लिए सेठी वायुसेना के अधिकारियों से मुलाकात करने भी चले गए थे। इसके बाद डाकू डर गए और चंबल के करीब 500 डाकूओं ने उनके आगे सेरेंडर कर दिया था।

ऐसे सीएम बने थे प्रकाश चंद्र सेठी-
श्यामाचरण शुक्ला ने 26 मार्च 1969 को जब मध्य प्रदेश सीएम की शपथ ली तो उनकी कई कांग्रेस नेताओं ने नहीं बनती थी। लेकिन उनके लिए सबसे ज्यादा मुश्किल तब पैदा हो गई, जब राष्ट्पति चुनाव हुए। राष्ट्रपति चुनाव में ज्ञानी जैल सिंह और नीलम संजीव रेड्डी खड़े थे। श्यामाचरण शुक्ला ने इंदिरा गांधी की मर्जी के खिलाफ जाकर नीलम संजीव रेड्डी को वोट दिया। इसके बाद इंदिरा गांधी के करीबियों ने उन्हें तंग करना शुरू कर दिया। मामला ज्यादा बढ़ा तो इंदिरा गांधी ने मध्य प्रदेश के सभी कांग्रेस विधायकों को दिल्ली तलब किया और उनके साथ बैठक की। इसके बाद शुक्ला ने 27 जनवरी 1972 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और उनका इस्तीफा मंजूर भी हो गया। इसके बाद प्रकाश चंद्र सेठी को कांग्रेस विधायकों का नया नेता चुना गया था।

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