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‘कोई भी एडीएम को शराब, चिकन नहीं पहुंचाएगा’, महिला SDM ने खोला मोर्चा और टॉप अधिकारी का हो गया ट्रांसफर

गर्ग ने बताया, "उन्होंने और बाकी जूनियर स्टाफ ने एक वॉट्सऐप ग्रुप पर इस बारे में लिखा था, क्योंकि एडीएम की मांगें लगातार बढ़ती ही जा रही थीं और वे पटवारियों को दिनों-दिन परेशान करती थीं।"

Madhya Pradesh, Guna ADM, Additional District Magistrate, Dilip Mandavi, Guna SDM, Sub Divisional Magistrate Shivani Garg, Guna, Madhya Pradesh, State News, Hindi Newsमध्य प्रदेश के गुना में एसडीएम शिवानी गर्ग।

मध्य प्रदेश के गुना में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) दिलीप मांडवी को गांव स्तर के अधिकारियों से शराब व चिकन मंगाने की आदत बेहद भारी पड़ी है। उनका इसी गंदी आदत के चलते ट्रांसफर हो गया है और ऐसा महिला सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) शिवानी गर्ग की वजह से हुआ। उन्होंने इस मसले पर एडीएम के खिलाफ मोर्चा खोला था। एसडीएम ने पटवारियों (गांव स्तर पर राजस्व अधिकारी) से वॉट्सऐप पर एक मैसेज के जरिए एडीएम की मांगों पर ध्यान न देने के लिए कहा था।

स्पष्ट लहजे में उन्होंने लिखा था, “एडीएम द्वारा दारू या फिर चिकन मंगाए जाने पर कोई भी उन्हें ये चीजें नहीं पहुंचाएगा।” उन्होंने इसके साथ ही सभी को चेताया था कि अगर इसके बाद भी एडीएम को दारू, चिकन पहुंचाया गया तब वे लोग भविष्य में उसका नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहें। एसडीएम की यही सतर्क करने वाला मैसेज आगे वायरल हो गया।

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने गर्ग के हवाले से कहा, “उन्होंने और बाकी जूनियर स्टाफ ने एक वॉट्सऐप ग्रुप पर इस बारे में लिखा था, क्योंकि एडीएम की मांगें लगातार बढ़ती ही जा रही थीं और वे पटवारियों को दिनों-दिन परेशान करती थीं। हमने इसी के चलते मैसेज पोस्ट किया और कलेक्टर के पास एक ज्ञापन सौंपा। अब वह (एडीएम) किसी से कुछ नहीं मांगेंगे।”

एएनआई से गर्ग बोलीं, “एडीएम की मांगें पूरी न होने पर वह बेवजह में झल्लाते और चिल्लाते थे। कलेक्टर के पास इसी सब को लेकर पूरे स्टाफ ने शिकायत दर्ज कराई।” वहीं, मंडावी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने एसडीएम के मैसेज के बारे में जानकारी होने से इन्कार कर दिया। इसी बीच, राज्य सरकार ने मामले से जुड़ी शिकायत का संज्ञान लेते हुए एडीएम का ट्रांसफर राज्य सचिवालय में कर दिया है।

बता दें कि सरकारी सेवा आचार संहिता के नियमों के मुताबिक, किसी अधिकारी या कर्मचारी का दूसरों से इस तरह से पेश आना घूस लेने या फिर ब्लैकमेल करने की श्रेणी में आता है।

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