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मंदिर का पुजारी छिपकली के जननांगों का यौन उत्तेजक दवा बता कर रहा था तस्करी, एसटीएफ ने चार को दबोचा

ऐसी छिपकली अक्सर रेगिस्तान, जंगलों और तटीय इलाकों में पाए जाते हैं। उनके शरीर पर कांटे होते हैं।

मध्य प्रदेश एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो छिपकली के जननांगों का ह्यूमन सेक्स पावर बूस्टर के तौर पर अवैध कारोबार करता था

वन्य प्राणियों की तस्करी में अब एक नए तरह का अवैध कारोबार जुड़ गया है। मध्य प्रदेश एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो छिपकली के जननांगों का ह्यूमन सेक्स पावर बूस्टर के तौर पर अवैध कारोबार करता था। एसटीएफ ने इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है। उनमें से एक खरगोन के मशहूर नवग्रह मंदिर का पुजारी है। उसके पास से 13 छिपकली बरामद किए गए हैं। पुजारी का नाम लोकेश जागीरदार है। पुजारी के अलावा छिपकली का कारोबार करने वाले तीन व्यापारी भी एसटीएफ के हत्थे चढ़े हैं। व्यापारियों के नाम सुमित शर्मा, सचिन शर्मा और फिरोज अली है।

दरअसल, ये लोग ऐसी छिपकली जो अक्सर रेगिस्तान, जंगलों और तटीय इलाकों में पाए जाते हैं, उसे पुरुषों का सेक्स पावर बढ़ाने वाला बता कर उसका कारोबार करते थे। इस तरह की छिपकली को  स्थानीय भाषा में ‘हाथा जोड़ी’ कहा जाता है। इसके शरीर पर कांटा होता है। यह आयुर्वेदिक पौधे ‘हाथ जोड़’ की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में होता है।

इंडिया टुडे के मुताबिक मध्य प्रदेश एसटीएफ ने 16-17 जून के बीच इंदौर से छिपकली के 68 टुकड़े बरामद किए हैं जो तस्करी के लिए ले जाए जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक तस्कर छिपकली के जननांगों के एक टुकड़े के एवज में लोगों से 5000 रुपये लेकर 15,000 रुपये तक वसूलते थे। राज्य के अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) आर पी सिंह ने इंडिया टुडे को बताया कि आरोपी पुजारी लोगों में हाथा जोड़ी छिपकली को लेकर धार्मिक भावना जगाता था और उसकी पूजा करवाता था। ताकि अधिक संख्या में ऐसी छिपकली मंदिर के पास आ सके।

शनिवार को सप्लायर राजेश पोरवाल को पहले इंदौर में गिरफ्तार किया गया, फिर उसकी निशानदेही पर अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारी ने बताया कि छिपकली का अधिकांश अंग पश्चिमी मध्य प्रदेश या राजस्थान के रेगिस्तान से लाया गया है। बता दें कि इस तरह के छिपकली इकोलॉजिकल बैलेंस के लिए जरूरी होते हैं। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत इनका शिकार करना अवैध और दंडनीय है।

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