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खरगोनः PM Awas Yojana में बना घर 5 बार हुआ जियो टैग, बुलडोजर से गिराने से एक हफ्ते पहले ही आई थी किस्त

जिलाधिकारी अनुग्रह पी. का कहना है कि यह सरकारी भूमि पर अतिक्रमण था और प्रशासन ने तय प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाया है। हालांकि, पड़ताल में ‘तय प्रक्रिया’ के दावे से अलग बातें सामने आ रही हैं।

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हसीना फखरू और प्रशासन द्वारा तोड़ा गया उनका घर (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस/हरिकिशन शर्मा)

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी जुलूस के दौरान उपद्रवियों द्वारा किए गए पथराव के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अवैध अतिक्रमण ध्वस्त करते हुए उस मकान को भी तोड़ दिया था जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना था। 65 वर्षीय विधवा महिला हसीना फखरू ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनकी एक न सुनी गई और मकान को मकान को गिरा दिया गया। जिलाधिकारी का कहना है कि यह सरकारी भूमि पर अतिक्रमण था और प्रशासन ने तय प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाया है। हालांकि, पूरे मामले की पड़ताल के बाद सामने आया है कि पीएम आवास योजना में बना यह घर 5 बार जियो टैग हुआ था।

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65 वर्षीय बुजुर्ग महिला के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान को प्रशासन ने 11 अप्रैल को गिरा दिया था। पड़ताल में सामने आया है कि हसीना के घर को पीएमएवाई दिशानिर्देशों के अनुसार पांच बार जियोटैग किया गया था। इसकी तस्वीरें निर्माण के दौरान अपलोड की गईं और दो तस्वीरों में लाभार्थी (वह और उसका बेटा) दरवाजे पर खड़े हैं।

वहीं, बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, हसीना फखरू के खाते में 2.5 लाख रुपए किस्तों के रूप में आए। ये रकम तीन बार (1-1 लाख और एक बार 50 हजार) में लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की गई थी। 1 लाख रुपए की पहली किस्त 28 अक्टूबर, 2020 को हसीना के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।

कब-कब क्या-क्या हुआ?

इमेज 1, 3, 4, 6 और 8 को जियो टैगिंग के जरिए PMAY-U की निगरानी के लिए बनाए गए सरकारी पोर्टल से लिया गया है। (फोटो-Bhuvan HFA)

1 लाख रुपए का दूसरी किस्त 31 मार्च, 2021 को और 50,000 रुपए की अंतिम किस्त 4 अप्रैल, 2022 को खाते में ट्रांसफर की गई थी। जबकि, चार राउंड की जियोटैगिंग और लाभार्थी के खाते में 2 लाख रुपए ट्रांसफर होने के बाद नगर तहसीलदार द्वारा 17 सितंबर, 2021 को हसीना को अतिक्रमण का पहला नोटिस भेजा गया था।

बुजुर्ग महिला ने तहसीलदार के आरोपों से इनकार किया था और इसी साल 10 मार्च को तहसीलदार कोर्ट ने मकान के निर्माण को अवैध घोषित करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद भी, लाभार्थी के खाते में 50,000 रुपए का भुगतान किया गया था। यह भुगतान 4 अप्रैल, 2022 को किया गया था। जबकि, 7 अप्रैल को दूसरे नोटिस के चार दिन बाद (11 अप्रैल) को हसीना के घर को ध्वस्त कर दिया गया था। महिला का कहना है कि इस तरह, एसडीएम या हाई कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील करने का समय नहीं मिला।

अधिकारियों ने कहा कि पीएम आवास को अलग पते के लिए मंजूरी दी गई थी, लेकिन उस पते के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, पड़ताल के दौरान रिकॉर्ड में हसीना से जुड़े तीन पते की जानकारी सामने आई। ध्वस्त मकान खसरा 379, खसखास बड़ी, बिड़ला मार्ग पर है। हसीना ने वार्ड नंबर 11, खसखास बड़ी मोहल्ला में अपने घर के एक्टेंशन के लिए आवेदन किया था। हसीना और उसके बेटे का कहना है कि ये दोनों एक ही पते हैं। वार्ड नंबर 11 में हसीना के किसी भी घर के बारे में पता नहीं लगा पाया।

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